This Dangal girl is real one…Not reel one

दंगल गर्ल्स’ सिर्फ फिल्म में नहीं, मध्य प्रदेश में भी हैं 

जैसे ही ‘दंगल गर्ल्स’ का जिक्र हो तो सीधा ध्यान आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ पर जाता है जो मशहूर फोगाट बहनों की कहानी है। विश्वास कीजिए ‘दंगल गर्ल्स’ अब मध्य प्रदेश की तीन बहनों को भी कहा जाता है- उमरेठ गांव (छिंदवाड़ा शहर से लगभग 30 किमी दूर) के किसान नंदलाल पवार की तीन बेटियां भारती, शिवानी और रितिका। इनमें से एक शिवानी का नाम अब राज्य और देश की सीमा को पार कर, कुश्ती की दुनिया में हो रहा है। इस भारतीय पहलवान ने अंडर 23 वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप में सिल्वर मैडल जीत लिया है- बेलग्रेड, सर्बिया में। इस तरह भारत के एलीट पहलवानों के कन्वेयर बेल्ट पर एक नई रोमांचक प्रतिभा  का नाम चमका है जो वास्तव में और भी बड़ा इतिहास बनाने के बहुत करीब थी।

50 किग्रा क्वालीफायर के जरिए इस चैंपियनशिप में शामिल होने वाली शिवानी जब फाइनल में पहुँची तो यूं लगा था  कि गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय पहलवान (पुरुष या महिला) बनेगी पर फाइनल में अमेरिका की मौजूदा जूनियर वर्ल्ड चैंपियन एमिली किंग शिल्सन ने हरा दिया। शिवानी ने भले ही गोल्ड के साथ इतिहास नहीं बनाया लेकिन उन भारतीय पहलवान की लिस्ट में शामिल हो गई जिन्होंने अंडर 23 वर्ल्ड्स में सिल्वर जीता है-टोक्यो ओलंपिक के ब्रॉन्ज़ विजेता बजरंग पुनिया और सिल्वर विजेता रवि दहिया।

कौन है ये शिवानी? मजेदार किस्सा ये है कि शिवानी स्कूल के दिनों में फुटबॉल और एथलेटिक्स में हिस्सा लेती थी- उमरेठ के पंडित विशंभर नाथ हाई स्कूल में पढ़ाई की। कोच कलाश्राम मार्सकोले ने फुटबॉल में आगे बढ़ाया और वह स्कूल टीम के साथ स्टेट चैंपियनशिप में खेली। एक पुरानी कुश्ती चैंपियन फातिमा बानो ने छिंदवाड़ा में एक टूर्नामेंट में शिवानी को देखा तो उन्हें लगा कि इसमें तो एक टॉप पहलवान बनने की क्षमता है। बानो ने ही कुश्ती से जोड़ा और भोपाल में एमपी स्पोर्टस एकेडमी में शामिल करा दिया।

इसके बाद वही फिल्म वाली कहानी- शुरूआती मुश्किलें किसान परिवार के लिए, ट्रेनिंग और डाइट के लिए पैसे की कमी पर परिवार ने  कभी नहीं रोका। उनके पास तीन एकड़ का एक छोटा सा खेत है। शिवानी ने लोकल दंगल में लड़ना शुरू कर दिया और जो पैसा जीता उससे ट्रेनिंग का इंतज़ाम होने लगा। रिश्तेदार और पड़ोसी के शिवानी को रोकने की कहानी यहां भी चली। आज सिर्फ शिवानी चर्चा में नहीं है- उनकी बहनों, भारती और रितिका ने भी स्टेट स्तर पर मुकाबलों में हिस्सा लिया है। कुछ ख़ास बातें :

*  शिवानी ने आठ नेशनल टूर्नामेंट में  हिस्सा लिया है- एक गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़ जीता।

*  जुलाई  2021 में नई दिल्ली में एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया।

*  फिलहाल एसएसबी में काम करने के साथ-साथ दिल्ली में ट्रेनिंग भी कर रही है।  

*  राज्य के सर्वोच्च खेल पुरस्कार- विक्रम पुरस्कार से भी सम्मानित। 

बानो  का जिक्र भी जरूरी है। उन्होंने भारत में महिला कुश्ती को उस समय से विकसित होते देखा है जब महिला नेशनल चैंपियनशिप भी नहीं थी। बानो ने 1997 में पहले सीनियर नेशनल में हिस्सा लिया और गोल्ड जीता। ये भारत में शुरूआत थी कुश्ती और उम्मीद थी कि इसे किसी दिन ओलंपिक में जगह मिलेगी। तीन और नेशनल में हिस्सा लिया और फिर चोट के कारण कुश्ती को छोड़ दिया। अब उन्हें लगता है शिवानी ओलंपिक में हिस्सा लेने का उनका सपना पूरा कर सकती है। बानो अब भोपाल में अपनी एकेडमी चलाती हैं। 

  • चरनपाल सिंह सोबती 
     

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