She went to Boxing ring to reduce weight but ended up being a champion


नंदिनी बॉक्सिंग रिंग में गई थी वजन कम करने – बन गई चैंपियन बॉक्सर 

चंडीगढ़ की 21 साल की नंदिनी सिंह, आज भारत की वह बॉक्सर है जिसकी निगाह पेरिस ओलंपिक पर है। बहरहाल यहां तक पहुँचने का किस्सा बड़ा मजेदार है। 
किसी भी अन्य बच्चे की तरह, नंदिनी को भी खाने का बड़ा शौक था। इस चक्कर में वजन बढ़ता गया। तब भी कभी वजन कम करने के बारे में नहीं सोचा। ये तो भला हो फिज़िकल एजुकेशन के टीचर का जिन्होंने इस तरफ ध्यान दिया और जबरदस्ती बॉक्सिंग रिंग में धकेल दिया। आज वही नंदिनी बॉक्सर है और देश की नई उम्मीद।  सबसे नई उपलब्धि – हिसार में 5वीं एलीट महिला नेशनल बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में 81+ किग्रा में गोल्ड। हरियाणा की नेहा को 5-0 से हराकर गोल्ड जीता और साथ में  एआईबीए वूमन वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर लिया – ये इस साल  दिसंबर में इस्तांबुल में होने वाली है।
इसे कहते हैं किस्मत। नंदिनी खुशकिस्मत थी कि सही वक़्त पर सही कोच मिले, माता-पिता ने सपोर्ट किया और वह आगे बढ़ती रही। पहले चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व करती थी- अब इंडियन रेलवे का जहां स्पोर्ट्स कोटा से नौकरी मिली। सरकारी नौकरी का फायदा ये हुआ कि पूरी तरह से ध्यान बॉक्सिंग पर लगाया। हिसार की नेशनल चैंपियनशिप से पहले उनकी दो सबसे बड़ी उपलब्धि सर्बिया में सेवन नेशंस कप में यूथ केटेगरी  में गोल्ड और दिल्ली में यूथ नेशनल्स में ब्रॉन्ज़ जीतना था। अब इससे भी आगे बढ़ना है और नज़र  2024 पेरिस ओलंपिक और अन्य चैंपियनशिप में मैडल जीतने पर है।  
उनके साथ जुड़ी एक और मजेदार बात ये है कि जैसे जैसे अपना वजन बदला- वेट केटेगरी बदली। बाद में यही वजन उनके लिए बॉक्सिंग में ताकत बन गया। हरियाणा के हिसार में पांचवीं एलीट वूमन नेशनल बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में 81+ किलो केटेगरी में हिस्सा लिया और आगे मिडिलवेट (75 किग्रा) – एक ओलंपिक केटेगरी – में हिस्सा लेने का इरादा है। ये मुश्किल है पर उन्हें पता है कि क्या कर सकती हैं?
माता-पिता – हरीश सूद और अंजलि सूद। इस समय रेलवे कैंप में कोच छोटू लौरा। लगभग दो महीने गुवाहाटी में  रेलवे कैंप में ट्रेनिंग ली इस हिसार इवेंट के लिए जहां कोच सागर मल धयाल भी थे कोच छोटू के साथ। पिता हरीश सूद व्यापारी हैं- खुद क्रिकेट एडवरटाइजिंग एजेंसी चलाते हैं और मोहाली के सोहाना गाँव में कई दुकानें हैं उनकी। उस समय नंदिनी का वजन 86 किलो से भी ज्यादा था जब 2016 में पहली बार सेक्टर 42 बॉक्सिंग सेंटर में कोच, जय हिंद के पास बॉक्सिंग ट्रेनिंग के लिए भेजा गया।
2017 :  सर्बिया में सेवन नेशंस कप में यूथ केटेगरी में गोल्ड जीता। 2017 :  दिल्ली में यूथ नेशनल्स में ब्रॉन्ज़। 2019 :  आल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन।  2019 :  रूस में वर्ल्ड चैंपियनशिप के ट्रायल में लाल कावावी को हराया।वहां पहले राउंड में हार।  2020 :  लॉकडाउन में तीन महीने से ज्यादा स्टेडियम में ट्रेनिंग नहीं हुई पर भारतीय टीम के पूर्व विदेशी कोच, बीआई फर्नांडीज और पीआईएस कोच सुनंदन बेरी वर्चुअल कोचिंग सेशन से ट्रेनिंग देते रहे।2021 :  अब ट्रेनिंग शुरू और पूजा रानी (टोक्यो ओलंपिक में 75 किलो क्वार्टर फाइनल) भी टिप्स दे रही हैं।  
कोच कहते हैं नंदिनी की सबसे बड़ी ताकत है कि वह सीखने की इच्छा रखती है। अब वर्ल्ड  चैंपियनशिप में जगह बनाने वाली चंडीगढ़ की पहली महिला बॉक्सर के टाइटल से आगे निकलना है। 
– चरनपाल सिंह सोबती 

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