This highly talented woman athlete is future prospect !

रिकॉर्ड तोड़ने की चाह में  हरमिलन ने पारिवारिक दायरा तोड़ा 

भारत की एथलीट हरमिलन बैंस 2021 सीज़न में सबसे प्रभावशाली एथलीट में से एक साबित हुई है। उसने महिला 800 मीटर और 1500 मीटर दोनों इवेंट में काफी सुधार दिखाया और जानकारों ने मान लिया है कि वह भविष्य की स्टार है। बैंस टोक्यो ओलंपिक 2020 के लिए क्वालीफाई करने की भी दावेदार थी- अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया पर क्वालीफाई नहीं कर पाई थी।

अब नज़र अगले ओलंपिक पर है। वारंगल में ओपन नेशनल चैंपियनशिप में हरमिलन बैंस ने नेशनल चैंपियनशिप में 1500 मीटर में 4.05.39 मिनट के साथ सुनीता रानी के 4.06.03 मिनट के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। सुनीता का रिकॉर्ड लगभग दो दशक पुराना (2002 एशियाड) था- इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ये कैसी चुनौती बना हुआ था। हरमिलन बैंस, होशियारपुर की 23 साल की लड़की वास्तव में जनवरी 2020 से 1500 मीटर की कोई रेस नहीं हारी है- तो सफलता क्यों नहीं मिलेगी? ऐसा लगा मानो उनके  कंधों से एक भार उतर गया हो।

 
हरमिलन की कहानी में एक मोड़ और है। आम तौर पर माता- पिता  ट्रेक के बाहर से हौसला बढ़ाते हैं पर हरमिलन को ये सपोर्ट सीधे ट्रेक पर मिली।शुरू में ये ठीक था पर बाद में इस सपोर्ट ने दबाव की शक्ल ले ली। वह दो पुराने एथलीटों की बेटी है- पिता अमनदीप सिंह 1,500 मीटर और मां माधुरी सिंह 800 मीटर में एशियाई खेलों की सिल्वर विजेता। इन दोनों ने हरमिलन को एथलीट तो बनाया पर उसके बाद भी उस पर कंट्रोल नहीं छोड़ा। उनकी लगातार सलाह और उम्मीद का दबाव हरमिलन के लिए नुकसान वाला साबित हो रहा था।

इस बार हरमिलन अकेले वारंगल गई। उसके पिता दो दिन बाद पहुंचे और दर्शकों की तरह स्टैंड से रेस को देखा। हरमिलन ने खुद कहा- ‘न सिर्फ मुझ पर, मेरे कोच पर भी दबाव डालते हैं। हर छोटी-छोटी डिटेल जानना चाहेंगे, सलाह देंगे और कोच भी इससे परेशान होने लगे थे।’ हरमिलन ने वारंगल में ये दायरा तोड़ दिया। कोई अनचाही सलाह नहीं मानी। ये बात उन हर मां- बाप के लिए मिसाल है जो अपने बच्चों को कभी अपने प्रभाव के दायरे से अलग नहीं कर पाते और वास्तव में उनके करियर को नुकसान पहुंचाते हैं। 
 
पिछले साल की शुरुआत में 4:14.68 मिनट के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में हरमिलन ने लगभग 10 सेकंड का सुधार कर लिया है और कोच सैनी का कहना है कि वजन कम करने, तेजी वाले वर्कआउट और बायोमैकेनिक्स से और सुधार होगा। इस नए रिकॉर्ड से वह टोक्यो खेलों के लिए क्वालीफाई नहीं करने की निराशा से बाहर आ गई है। इस साल जून में, इंडियन ग्रां प्री- 4 में हरमिलन ने टोक्यो बर्थ की उम्मीदें जगाने के लिए 4: 08.27 का समय निकाला, लेकिन अपने अगले मुकाबले, नेशनल इंटर स्टेट चैंपियनशिप में 4:15.52 के समय ने गड़बड़ कर दी। 
 
एक बच्चे के तौर पर पढ़ाई में अच्छी थी- इरादा था साइंटिस्ट/ इंजीनियर बनना। माता-पिता एथलीट बनाने में लगे रहे- जब डिस्ट्रिक्ट स्तर पर जीतने लगी तो उनकी ये चाह और बढ़ गई। 2015 तक एथलेटिक्स अभी भी हरमिलन के लिए लिस्ट में टॉप पर नहीं थी। तब पिता ने धर्मशाला में साई के हॉस्टल में रहने के लिए भेज दिया।

पहला झटका 2013 में लगा- 13 साल की थी और डोप टेस्ट में फेल हो गई। माहिलपुर में एक डॉक्टर ने उसे टॉन्सिलिटिस के लिए जो दवाएं दीं उनसे गड़बड़ हुई। इस चक्कर में दो साल गंवाए। 2017 में, ज्यादा वर्कआउट के कारण घुटने में चोट लग गई- वापस आने में लगभग एक साल लग गया। घुटने की कैप पहनी जिसकी कीमत 20,000 रुपये थी। आपको ये जानकार हैरानी होगी कि धर्मशाला सेंटर में एक रसोइए से मदद मिली- वे हॉकी खिलाड़ियों को मसाज देकर चोटों से ठीक करते थे और उनके हाथ के जादू ने हरमिलन के घुटने की चोट को भी ठीक कर दिया।


हरमिलन का मानना है वह 800 मीटर की तुलना में मीट्रिक मील रेस में कहीं बेहतर एथलीट हो सकती है- इसलिए आगे पूरा ध्यान इसी पर लगाना  चाहती है ताकि मैडल जीतने की उम्मीद में सुधार हो सके। भविष्य में 1500 मीटर इवेंट पर ही ध्यान होगा।
 
– चरनपाल सिंह सोबती 
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