Sportsmanship ! Does it exist in today’s world?.

Sportsmanship ! Does it exist in today’s world

पूनम राउत ने दिल की आवाज़ सुनी – अंपायर के फैसले की चिंता कौन करे ?
28 सितंबर 2021 : केकेआर के विरुद्ध मैच में ,दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान रिषभ पंत के शरीर से लगकर गेंद दूर जाने पर,अश्विन के साथ, रन लेने के मामले में बहस। हुआ ये कि नॉन-स्ट्राइकर सिरे पर रिषभ पंत को फील्डर राहुल त्रिपाठी द्वारा फेंकी गेंद लगी, गेंद दूर गई तो अश्विन ने रन की आवाज़ लगा दी।

मामला बन गया स्पोर्ट्समैनशिप का कि ऐसी ओवर थ्रो पर रन लेना चाहिए या नहीं? अश्विन की आलोचना क्यों- उस खिलाड़ी को दोष क्यों देते हैं जो क्रिकेट को उसके नियमों के भीतर खेलता है? इससे कुछ ही घंटे बाद, हज़ारों मील दूर, पूनम राउत ने स्पिरिट ऑफ क्रिकेट की नई परिभाषा लिख दी। 
ऑस्ट्रेलिया – भारत टेस्ट में एक समय भारत पहली पारी के 81वें ओवर में 217-2 के स्कोर पर था। पूनम ने ऑफ स्टंप के बाहर सोफी मोलिनेक्स की गेंद को खेला। विकेटकीपर एलिसा हीली के ग्लव्स में गेंद,ऑस्ट्रेलियाई फील्डर की अपील लेकिन अंपायर फिलिप गिलेस्पी ने ‘नॉट आउट’ कहा। अनोखा नज़ारा ये कि तब भी पूनम पवेलियन चली गईं यानि कि खुद ही मान लिया कि वे आउट हैं।’वाक आउट’ की लगभग ख़त्म हो चुकी परम्परा को पूनम ने नई लाइफ लाइन दे दी। इस तरह से पूनम राउत ने दूसरे दिन ईमानदारी का एक बेमिसाल नमूना पेश किया।   आज क्रिकेट में अंपायर के आउट न देने पर भला कोई  वाक आउट करता है? बड़े बड़े दिग्गजों ने भी ऐसा नहीं किया। सचिन तेंदुलकर ने भी हर बार ऐसा नहीं किया। सुनील गावस्कर खुद बता चुके हैं कि वर्ल्ड कप में 60 ओवरों में 36 रन बनाने के दौरान वे दूसरी गेंद पर आउट थे- किसी ने अपील नहीं की थी, इसलिए वह रुके रहे। इसी तरह कराची में दो 100 बनाने के दौरान, जब सुनील गावस्कर पहली पारी में आउट नहीं थे तो उन्हें आउट दे दिया और जब दूसरी पारी में उन्हें आउट होने पर भी,आउट नहीं दिया तो वे भी खड़े रहे- हिसाब बराबर हो गया। 
आज की क्रिकेट में इसे मूर्खता कहने वाले ज्यादा हैं। सबसे मशहूर किस्सा वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में एडम गिलक्रिस्ट का है। एडम गिलक्रिस्ट का कैच 2003 में पोर्ट एलिजाबेथ में अरविंद डी सिल्वा की गेंद को छूने के बाद  लपका गया था। गिलक्रिस्ट ने लिखा- ‘मैं खुद के साथ ईमानदार था। ये भी सोचा कि अपना नज़रिया देख रहा हूँ- टीम के प्रति मेरी जिम्मेदारी का क्या होगा?अगर हम यह मैच हार जाते तो मुझे कैसा लगता?’
यही बात पूनम ने कही- ‘मुझे पता था कि मैं आउट हूँ। मैंने अपनी आत्मा की सुनी और उस समय जो सही लग रहा था वह किया। आमतौर पर जब विकेट गिरता है तो कोई भी टीम इसे पसंद नहीं करती है और ऐसा ही होता है।’
इसी तरह महिला क्रिकेटरों को तो टेस्ट खेलने के मौके ही कम मिलते हैं- इसे ध्यान में रखते हुए, जो पूनम ने किया वह अनोखा है। पूनम अपने 12 साल के इंटरनेशनल करियर में सिर्फ चौथा टेस्ट खेल रही थी।

उनकी टीम की खिलाड़ी भी हैरान रह गईं- थामेट्रिकॉन स्टेडियम में सेंचुरी बनाने वाली स्मृति मंधाना ने मैच के बाद कहा- ‘एक बार तो मन में ख्याल आया कि उसने ऐसा क्यों किया? अब सोचती हूँ यह कुछ ऐसा कर दिया,जिसका हम सभी बहुत सम्मान करते हैं।’

– चरनपाल सिंह सोबती

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