Indian U 18 girls bag silver !

भारत की अंडर-18 लड़कियों ने एशियाई रग्बी में सिल्वर जीता पर कोई खबर नहीं !
भारत में रग्बी कितना लोकप्रिय है- ये सवाल पूछें तो जवाब यही होगा कि इसे कौन खेलता है? इसीलिए ही तो भारत की अंडर-18 लड़कियों के एशियाई  रग्बी में सिल्वर जीतने की कहीं चर्चा भी नहीं हुई। 
दो महीने से भी पहले की ही तो बात है। नेशनल कैंप में पहले दिन, रग्बी कोच लुडविच वान डेवेंटर के हवाले की गईं 52 युवा, शर्मीली लड़कियां जिनमें से कई को पूरी तरह से ये भी नहीं मालूम था कि वे यहां आई क्यों हैं- ज्यादातर ने पहले कभी रग्बी को नहीं खेला था। आम तौर पर नेशनल अंडर-18 टीम के लिए स्काउटिंग,जूनियर नेशनल टूर्नामेंट के जरिए होती है जहां राज्य की टीमें  हिस्सा लेती हैं। चूंकि कोविड के कारण करीब दो साल से नेशनल टूर्नामेंट का आयोजन नहीं हुआ था, इसलिए रग्बी इंडिया को इस बार कुछ अलग करना पड़ा। कोच ने पूल को घटाकर 14 कर दिया। विश्वास कीजिए – कुछ ही हफ्ते बाद इन्हीं लड़कियों ने सिल्वर जीता। कहाँ और कैसे?
टूर्नामेंट :अंडर -18 एशिया रग्बी सेवन्स चैंपियनशिप । कहाँ : उज्बेकिस्तान के ताशकंद में। कप्तान :अंशिका चौहान।  टूर्नामेंट कब खेला :18-19 सितंबर 2021 नतीजा : फाइनल में यूएई से 17-21 से हारे। शुरुआती मिनटों में 0-7 से पिछड़ने के बाद, एक समय दोनों टीम बराबरी पर थीं। इसके बाद पासा पलटा। टीम (5) : कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), भारत और मेजबान उज्बेकिस्तान।

इस तरह COVID-19 के कारण नेशनल स्तर पर न खेलने के बावजूद, टीम सीधे एक इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेली और फाइनल में पहुंचने में कामयाब  रही। सेमीफाइनल में, कजाकिस्तान को 24-7 से हराया- इन्हीं से अपना पहला मुकाबला 10-12 से हार गए थे। उसके बाद उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान पर क्रमशः 20-5 और 63-0 से जीत दर्ज करके वापसी की। बाद में यूएई ने भारत को 29-12 से हराया।
फाइनल में पहुंचने में कामयाब रहे- गोल्ड जीत लेते तो और ज्यादा खुश होते। टीम ने अपनी तरफ से कोशिश में कोई कमी नहीं रखी। कप्तान चौहान, बीपीएड (Bachelor of Physical Education) में दूसरे साल की पढ़ाई कर रही हैं। जो हुआ वह किसी चमत्कार से कम नहीं।  
खेलों के नक़्शे पर भारत की हाल की कामयाबियों में जिस एक राज्य ने सबसे बड़ा योगदान दिया है, वह ओडिशा है। जब कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही थी तो रग्बी इंडिया के पार्टनर बने ओडिशा राज्य सरकार और तभी ताशकंद के टूर्नामेंट की तैयारी शुरू हुई। नेशनल ट्रेनिंग और सेलेक्शन कैंप लगा 14 अगस्त से भुवनेश्वर में आईआईटी यूनिवर्सिटी कॉम्प्लेक्स में। कैंप में थे कोच हेंड्रिक ‘नास’ बोथा, दक्षिण अफ्रीका के चार बार के वर्ल्ड रग्बी प्लेयर ऑफ द ईयर और रग्बी सेवन्स विशेषज्ञ लुडविच वान डेवेंटर ट्रेनिंग देने के लिए। यहीं से सीधे ताशकंद का सफर शुरू हुआ।  
ये वे लड़कियां थीं जिनमें से ज्यादातर ने इससे पहले बहुत कम कांटेक्ट रग्बी खेला था,16-17 उम्र की वे लड़कियां जो कभी हवाई जहाज पर नहीं बैठी थीं और जिनके लिए सबसे बड़ी चिंता थी कि क्या ताशकंद में भारतीय खाना मिलेगा? इसीलिए कोच भुवनेश्वर से ताशकंद के भारतीय रेस्ट्राँ भी ढूंढ रहे थे। टूर्नामेंट में उनके और बाकी टीमों के बीच का अंतर कमाल का था। कप्तान ने लौटकर बताया- पहली बार जब हम कजाकिस्तान के विरुद्ध मैच के लिए मैदान पर उतरे, तो यूं लगा कि लड़कियों की नसें ठंडी पड़ गई हों- वे दूसरी टीम की लड़कियों की भारी और मजबूत फिजीक देखती ही रह गईं।  
सरकारी मदद से, ताशकंद में क्वारंटीन से बचे और टीम टूर्नामेंट से चार दिन पहले उज़्बेक राजधानी पहुंची। पहला दिन- कोच ने टूरिस्ट बस पर शहर घुमाया,एक भारतीय रेस्तरां में खाना खिलाया और उसके बाद सेवन्स की बात की। 
इसमें कोई शक नहीं कि सभी बेहतर  एशियाई टीम इस टूर्नामेंट में नहीं खेलीं पर करीब दो साल में ये पहला मुकाबले वाला कॉन्टीनेंटल टूर्नामेंट था। 
– चरनपाल सिंह सोबती 

SPORTSNASHA

www.sportsnasha.com is a venture of SRC SPORTSNASHA ADVISORS PVT LTD. It is a website dedicated to all sports at all levels. The mission of website is to promote grass root sports.

Show Buttons
Hide Buttons