India inching towards becoming world Chess Power!

दुनिया शतरंज में भी भारत के ‘पावर’ बनने का नजारा देख रही है 
कोविड महामारी के दिनों में, जिन बातों ने देश को कुछ राहत दी उनमें से एक खेल हैं। ओलंपिक और पैरालंपिक में मिली कामयाबी की चर्चा अभी तक हो रही है। इस दौरान जिस एक और खेल में भारत की कामयाबी का ग्राफ लगातार ऊपर गया वह शतरंज है- शतरंज में यूएसए, चीन और रूस जैसी महाशक्तियों के सामने अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाना ही बहुत बड़ी बात है।


ये जिक्र क्यों हो रहा है? इस सवाल का जवाब एक नई खबर में है। हंगरी में राजा ऋत्विक बने भारत के 70वें जीएम यानि कि ग्रैंडमास्टर। हंगरी में एक इवेंट में अपना तीसरा और आख़िरी नॉर्म हासिल किया- पहला नॉर्म 2019 में और इस साल, लगभग एक महीने के अंदर स्कालिका ओपन में दूसरा नॉर्म और अब हंगरी में तीसरा। इसी टूर्नामेंट के चौथे राउंड में वैक्लेव फिनेक को हराकर जादुई 2500 एलो पॉइंट को भी छुआ। क्या आप जानते हैं कि राजा की उम्र क्या है- सिर्फ 17 साल। अभी पिछले महीने ही तो पुणे के हर्षित भारत के 69वें जीएम बने थे।
ग्रैंड मास्टर की ये  गिनती हैरान करने वाली है। ख़ास तौर पर यह ध्यान रखते हुए कि कोई भी भारतीय पहली बार सिर्फ 1988 में ही तो इस मुकाम पर पहुंचा था- स्वतंत्रता के पूरे 41 साल बाद। इस तरह ये सभी ग्रैंडमास्टर पिछले 33 साल की ही देन हैं। ये सिलसिला और किसी ने नहीं विश्वनाथन आनंद ने शुरू किया था।  2012 से अब तक 45 भारतीय खिलाड़ी ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल कर चुके हैं यानि कि शतरंज में सबसे बड़ी उपलब्धि और ये कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। इस मामले में तो चीन और अमेरिका भी पीछे रह गए जबकि सिर्फ रूस आगे है और उनसे भी इस गिनती में कांटे की टक्कर चल रही है। इतना ही नहीं, पुरुषों और महिलाओं की भारतीय टीम 2020 FIDE ऑनलाइन शतरंज ओलंपियाड में रूस के साथ पहले नंबर पर रही थी।
इस मामले में कुछ बातें ध्यान देने वाली हैं- 
*   पिछले 21 जीएम में से लगभग आधे 18 साल या उससे कम उम्र में इस मुकाम पर पहुंचे।  *   इनमें से ज्यादातर किसी बड़े शहर के नहीं हैं। इससे ये भी अंदाज़ा हो जाता है कि अन्य दूसरे खेलों की तरह शतरंज ने भी बड़े शहरों के प्रभुत्व को तोड़ा। शतरंज को छोटे शहरों और कस्बों से गजब की टेलेंट मिली है।
आखिरकार ये संभव हुआ कैसे? 
*  भारत में शतरंज को इसके पहले जीएम विश्वनाथन आनंद और कोनेरू हम्पी जैसी महिला खिलाड़ी के तौर पर वे रोल मॉडल मिले जिनकी ओर युवा खिलाड़ियों ने देखा और उन जैसा बनने की कोशिश की। आनंद दुनिया के टॉप खिलाड़ी भी गिने गए जबकि हम्पी मौजूदा महिला वर्ल्ड रैपिड शतरंज चैंपियन हैं और 2002 में रैंक हासिल करने के बाद जीएम बनने वाली सबसे कम उम्र की महिला थीं।
*  आज की डिजिटल दुनिया में, इंटरनेट ने हर किसी को शतरंज इंजन और डेटाबेस के साथ जोड़ दिया है- न सिर्फ बेहतर ट्रेनिंग, विशेषज्ञों की राय पाना बहुत मुश्किल नहीं रहा।  *  नई  शतरंज मशीन आ गई हैं- ये मशीनें खेल के जीतने और हारने के पैटर्न बताती हैं जो मैच के दौरान खिलाड़ी की मदद करते हैं। 
बहरहाल अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है और नई मंज़िलों को हासिल करना है- इस समय व्यक्तिगत तौर पर कोई खिलाड़ी टॉप 10 में नहीं है, और नॉरवेगिया के मैग्नस कार्लसन को चुनौती दे सकने वाला भी कोई नहीं। भारत के जीएम के बढ़ते रोस्टर में सिर्फ दो महिलाएं हैं।
शतरंज में अवसर बढ़ रहे हैं, मुश्किलें कम हो रही हैं- इसी से ये कह सकते हैं कि बहुत जल्दी नई चुनौती को पूरा करने वाले भी सामने आएँगे।

 – चरनपाल सिंह सोबती 

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