17 athletes won Medals at Paralympics, What more ?

टोकियो पैरालंपिक: 54 एथलीट,17 ने मैडल जीते- और क्या चाहिए?
कामयाबी की कोई सीमा नहीं तो ये क्यों सोचें कि 17 एथलीट का टोकियो पैरालंपिक में मैडल जीतना ही बहुत है – इससे भी बड़ी कामयाबी को आगे के लिए लक्ष्य बनाना है। बहरहाल इस सोच में भारत के पैरालंपियनों ने जिन मुश्किलों को पार करते हुए अपने  सपनों को साकार किया- उसके लिए उनकी तारीफ में क्यों कंजूसी करें? कुल मिलाकर 54 एथलीट टोकियो पैरालंपिक में गए और उनमें से 17 के गले में मैडल डले – ये कोई मामूली बात नहीं है। सबसे बड़ी बात ये कि शायद ये पहला मौका है कि पूरे देश ने इनके प्रदर्शन में रूचि ली। मैडल तालिका को रोज़ वैसे ही देखा जैसे क्रिकेट मैचों के स्कोर कार्ड देखते हैं- वह भी उन दिनों में जब कि विराट कोहली की टीम एक बड़ी टेस्ट सीरीज खेल रही थी।
कामयाबी का अंदाज़ा इस रिकॉर्ड से लगाइए कि इस  पैरालंपिक से पहले भारत का रिकॉर्ड कुल 12 मैडल का था। इस बार एक ही पैरालंपिक से 19 मैडल आए और उनमें से 5 गोल्ड। 2016 के रियो खेलों में भारत ने पांच खेलों के लिए 19 एथलीट भेजे थे और वे चार मैडल के साथ लौटे थे।खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने ठीक कहा- ‘भारतीय पैरालंपियन का अभूतपूर्व उदय! एक नए युग की शुरुआत हुई है।’

इन 19 मैडल ने भारत को मैडल तालिका में 24 वें नंबर पर जगह बनाने में मदद की- सबसे ख़ास बात ये कि ये एक ऐसा प्रदर्शन था जिसके दौरान लगभग हर दिन इतिहास रचा गया।  यहां तक कि पैरालंपिक के आख़िरी दिन भी मैडल की दौड़ थमी नहीं- नोएडा के जिला मजिस्ट्रेट सुहास यतिराज ने बैडमिंटन शो  को पूरा किया एक सिल्वर के साथ और कृष्णा नागर ने गोल्ड जीता। 
टोकियो पैरालंपिक में जो हुआ, वह इस बात के लिए प्रेरणा है कि आगे कुछ भी असंभव नहीं! हर एथलीट की कहानी में कुछ न कुछ ऐसा है जो रोंगटे खड़े कर देगा और तब पता लगेगा कि  पैरालंपिक तक इन सभी ने कैसी मेहनत की ? वास्तव में, ये सभी, यहां तक कि जिन्होंने मैडल नहीं जीता, हिम्मत और  दृढ़ता के प्रतीक हैं। मुश्किल परिस्थितियों के कारण सबसे अच्छे से सबसे बुरे दिनों में भी असंभव को संभव बनाने वाले।

इस  पैरालंपिक के बहाने ये बताया कि मुश्किलों से लड़ने का क्या मतलब है? अगर COVID-19 से पीड़ित दुनिया को लड़ने के लिए प्रेरणा की जरूरत है, तो यह टोकियो पैरालंपिक में खूब  थी।इन पैरालंपिक ने एक पुराने मार्केटिंग सन्देश को सही ठहरा दिया – “ओलंपिक वह जगह है,जहाँ हीरो बनते हैं। पैरालम्पिक्स वह जगह है जहाँ हीरो आते हैं।”
टोकियो 2020 पैरालंपिक खेलों में जाने से पहले, भारत ने पैरालिंपिक के इतिहास में 12 मैडल (4 गोल्ड ) जीते थे। जापान में दो हफ्ते के बाद, ये गिनती अब 31 मैडल (9 गोल्ड,12 सिल्वर,10 ब्रॉन्ज़) पर है। इन सभी हीरो को सलाम!
– चरनपाल सिंह सोबती 

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