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टोकियो पैरालंपिक : वेट ट्रेनिंग के लिए एलपीजी सिलेंडर उठाते रहे

पैरालंपिक के लिए भारत के 54 एथलीट टोकियो पहुँच चुके हैं – इस उम्मीद के साथ कि अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ वापस लौटेंगे। भारत ने इससे पहले कभी इतने एथलीट पैरालंपिक के लिए नहीं भेजे थे – कभी भी गिनती 20 से ज्यादा नहीं थी। इस तरह टोकियो के दोनों आयोजन में सबसे बड़ी टीम का रिकॉर्ड बन रहा है।  इस टीम में भी मैडल के कुछ जोरदार दावेदार हैं – देवेंद्र झाझरिया एफ-46 जेवलिन थ्रो में अपना तीसरा पैरालंपिक गोल्ड (2004 और 2016 के बाद) जीतने के दावेदार और मरियप्पन थंगावेलु (टी -63 हाई जम्प) और वर्ल्ड चैंपियन संदीप चौधरी (एफ -64 जेवलिन थ्रो) भी मैडल का दावा कर रहे हैं। भारत 9 खेलों की इवेंट में हिस्सा लेगा।
रियो में पिछले पैरालंपिक में गोल्ड जीतने वाले मरियप्पन 24 अगस्त को उद्घाटन समारोह के दौरान भारतीय टीम के फ्लैग बेयरर होंगे। टोक्यो पैरालंपिक 5 सितंबर तक चलेंगे।
खिलाड़ियों को विदा करते हुए खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक वीडियो संदेश में ठीक कहा – ‘हमारे पैरा एथलीटों की महत्वाकांक्षा और आत्मविश्वास 1.3 अरब भारतीयों को प्रेरणा देते हैं। उनके साहस के सामने, सबसे बड़ी चुनौतियां झुकती हैं। और वे इसके हर हिस्से के लायक हैं।मुझे आपकी क्षमता पर पूरा भरोसा है। मुझे विश्वास है कि आपका प्रदर्शन भी पिछली बार से बेहतर होगा।’ आपको ये जानकार हैरानी होगी कि पैरा एथलीटों ने अब तक 3 खेल रत्न, 7 पद्म श्री और 33 अर्जुन पुरस्कार जीते हैं।
पीसीआई अध्यक्ष दीपा मलिक (जिन्होंने खुद रियो 2016 खेलों में शॉट पुट में सिल्वर जीता था), ने कहा – ‘ टोकियो 2020 पैरालंपिक के बाद, इन एथलीट और इनकी कोशिश की चर्चा भी पहले से बिलकुल अलग होगी।’ इरादा पक्का है तभी तो ये एथलीट हर मुश्किल से जूझते हुए मेहनत करते रहे – उस कोविड से भी मुकाबला किया, जिसके लिए कोई तैयारी नहीं थी।  
भारत के टॉप पैरा एथलीट (पैरालिंपिक में दो गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय) देवेंद्र झाझरिया को ही लें – उन्हें तो लॉक डाउन और कोविड में अपने भाले के बिना ट्रेनिंग करनी पड़ी – घर में या घर के आस -पास जेवलिन फेंकने के लिए जगह कहाँ से आए? दूसरी तरफ कोच ने कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, घर में बैठे – बैठे वजन नहीं बढ़ाना है क्योंकि उनकी उम्र में, वजन बढ़ने से वास्तव में प्रदर्शन पर असर पड़ेगा।घर पर थेरबैंड और एक्सरसाइज बॉल जैसे बुनियादी उपकरणों के साथ, झाझरिया फिट रहने की कोशिश करते रहे – एक्सरसाइज के लिए कार के किनारे मददगार बने तो वेट ट्रेनिंग के लिए एलपीजी सिलेंडर उठाते रहे। इन एथलीट को घर पर जरूरी इक्विपमेंट उपलब्ध कराने का कोई इंतज़ाम नहीं हुआ था।  
22 साल की सिमरन शर्मा – वे 100 मीटर रेस में हिस्सा लेंगी अपने पहले पैरालिंपिक में। घर में रहने से एक फायदा ये मिला कि वे ट्रेनिंग करती रहीं और पति ने बाकी का काम किया। खाना बनाना और सफाई करना भी – ‘ वह चाहते थे कि मैं सिर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान दूं।’ यहां तक कि जब सिमरन को कोविड हो गया और थकान से जूझना पड़ा, तब भी उनके पति ने ही सही खाने और बेहतर होने में मदद की।
ऐसी कोशिश होगी और पक्का इरादा – तो मैडल क्यों नहीं आएँगे?
– चरनपाल सिंह सोबती 

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