Tokyo Paralympics- How many Medals India expects ?

Tokyo Paralympics- How many Medals India expects ?
टोकियो पैरालंपिक: एक नए रिकॉर्ड के साथ शुरूआत और भारत का 15 मैडल का दावा  
 
टोकियो पैरालंपिक 24 अगस्त से शुरू हैं पर भारत ने तो इस शुरूआत से पहले ही एक नया रिकॉर्ड बना दिया। कौन सा? 
 भारत ने 54 पैरा-एथलीट की अपनी आज तक की सबसे बड़ी टीम भेजी है – गुरशरण सिंह टीम के शेफ डी मिशन हैं। उनके नाम के साथ अरहान बागती के नाम का भी जिक्र जरूरी है जो टीम के डिप्टी शेफ डी मिशन हैं। रिकॉर्ड ये है कि  पहली बार भारत की टीम के साथ कोई डिप्टी डी मिशन पैरालंपिक में गया है और वर्ल्ड रिकॉर्ड ये कि सिर्फ 22 साल की उम्र के साथ वे किसी भी टीम के आज तक के सबसे छोटे डिप्टी शेफ डी मिशन हैं। विश्वास कीजिएगा उन्हें भारत की  टोकियो पैरालंपिक की बेहतर तैयारी के पीछे बहुत बड़ी प्रेरणा माना जा रहा है। 22 साल की उम्र और ऐसा नाम – कौन हैं ये अरहान बागती?

अरहान बागती, 2015 से पैरालंपिक के लिए गुडविल एम्बेसडर हैं। अमेरिका के पामोना कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। बहरहाल पैरालंपिक में उनकी रूचि उससे भी पहले की है। 2015 में जब वे गुरुग्राम में श्री राम स्कूल में 12 वीं में पढ़ते थे, तब ही InRio ऐप बना दिया था – रियो 2016 में पैरालंपिक एथलीट को डाइट, फिटनेस जैसे मसलों के सवालों के ऑनलाइन जवाब में मदद के लिए – ऐप ये भी बताता था कि वे शहर में कहाँ कहाँ घूम सकते हैं, एमरजेंसी फ़ोन नंबर, गेम विलेज के अंदर और बाहर की जगह का रूट मैप और इतना ही नहीं एथलीट को रियो में भारतीय समुदाय से भी जोड़ने में मदद वाला था।

 

इस बार IndTokyo ऐप बनाया पर बायो बबल के कारण इसका बहुत कम इस्तेमाल हो पाएगा। अभी से उनकी नज़र पेरिस 2024 पर है।
 

अब सवाल ये है कि ये सब पैरा एथलीट के लिए ही क्यों? असल में किस्सा शुरू हुआ 2014 में। तब वे पैरा स्पोर्ट्स के बारे में कुछ भी नहीं जानते थे। खुद एथलीट थे और दिल्ली में पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (पीसीआई) के स्पोर्ट्स फॉर डेवलपमेंट रन में भागने इसलिए पहुँच गए कि ट्रैक लीजेंड मिल्खा सिंह मुख्य अतिथि हैं और उन्हें देख लेंगे – सेल्फी का मौका मिल गया तो बोनस। जब वे रन के लिए अपनी टी-शर्ट लेने गए तो वहां पता लगा कि प्रोग्राम के लिए एक ऑडियो-विज़ुअल कंपाइल करने वाले की सख्त जरूरत है – अरहान ये जानते थे और कह दिया कि वे ये काम करेंगे। इस तरह न सिर्फ मिल्खा सिंह, कई पैरा कोच से भी बात करने का मौका मिला और तब उन्हें पता लगा इन पैरा एथलीट की मुश्किलों के बारे में। वहीं से पैरा स्पोर्ट्स से जुड़ गए। यहां तक कि बागती ने रियो 2016 में पैरा-एथलीट गोल्ड विजेता मरियप्पा थंगावेलु और वरुण सिंह भाटी को स्पांसर किया था – अपनी पूरी पॉकेट मनी दे दी और अपने परिवार और दोस्तों से भी मदद ली। वही सिलसिला चलते चलते अब वे टोक्यो पैरालिंपिक में भारतीय टीम के डिप्टी शेफ डी मिशन हैं।  


जब 19 अगस्त को भारतीय पैरा एथलीट का पहला बैच टोकियो पहुंचा तो वे उसके साथ थे। दिल्ली में जन्मे और पले-बढ़े- पिता कश्मीर से हैं। इन एथलीट के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी को वे पैरा स्पोर्ट्स के प्रति जागरूकता की  कमी से जोड़ते हैं – यही जागरूकता पैदा करना उनका लक्ष्य है। पीसीआई के अवेयरनेस एंड इम्पैक्ट एंबेसडर हैं वे – कॉरपोरेट्स को प्रेजेंटेशन देते हैं ताकि वे मदद के लिए आगे आएं। यह अरहान ने ही कहा कि इस बार 15 मैडल का लक्ष्य रखा है और इसे पूरा करने की काफी संभावनाएं हैं।
 
– चरनपाल सिंह सोबती 
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