Target top 10 in 2028 Olympics Medal Tally for India !

Target top 10 in 2028 Olympics Medal Tally for India !
2028 में टॉप 10 के दावे की पहली मंज़िल टोकियो में पार हो गई – भारत का ओलंपिक रिपोर्ट कार्ड 
टीम के टोक्यो जाने से कुछ दिन पहले, उस समय के केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि भारत की 2028 ओलंपिक में टॉप-10 में जगह बनाने की तैयारी शुरू हो गई है।2024 के खेल बीच में आएँगे पर लक्ष्य 2028 है। उन्होंने कहा था कि वर्ल्ड चैंपियन बनने में चार से आठ साल लगते हैं। सरकार ने अपनी विभिन्न स्कीम से बेहतर कोचिंग और तकनीकी मदद के नए नए रास्ते खोले हैं। 
 
वास्तव में टोकियो इस इरादे का पहला पड़ाव साबित हुआ। टोकियो ओलंपिक मैडल लिस्ट में भले ही भारत का नाम टॉप 50 देश में 48 वे रैंक पर है (कुल मैडल की गिनती में नंबर 33) पर ये भी सच है कि कुछ प्रदर्शन ऐसे हुए जिनसे देश का सम्मान बढ़ा। ये साबित हुआ कि अब सिर्फ गिनती बढ़ाने के लिए ओलंपिक में हिस्सा लेने नहीं जाते – ऐसे ही मेहनत जारी रही तो वह दिन दूर नहीं जब भारत के नाम भी ढेरों मैडल होंगे।
 
टोकियो 2020 से भारत के लिए सबसे बड़ी खबर ये रही कि भारत ने ओलंपिक में अपने अब तक के सबसे ज्यादा मैडल जीतने का रिकॉर्ड बनाया। ये खबर भी कम नहीं है कि जेवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा गोल्ड जीतने वाले देश के पहले ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बन गए- गोल्ड के लिए ओलंपिक में उनके भाले ने 87.58 मीटर की दूरी तय की। इसी गोल्ड के साथ, भारत  ने कुल 7 मैडल जीते, जो अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।नीरज के साथ टोक्यो 2020 में बजरंग पुनिया (ब्रॉन्ज़), मीराबाई चानू (सिल्वर), पीवी सिंधु (ब्रॉन्ज़),लवलीना बोरगोहेन (ब्रॉन्ज़), पुरुष हॉकी टीम (ब्रॉन्ज़) और रवि कुमार दहिया (सिल्वर) ने भी मैडल जीते। इससे बड़ी कामयाबी और क्या होगी?
ये ठीक है कि मैडल की गिनती उम्मीद से कम रही क्योंकि कुछ वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर 1 और 2  भी मैडल नहीं जीत पाए- अन्यथा इससे भी बड़ी कामयाबी की बात कर रहे होते। इस बार मैडल की उम्मीद थी तभी तो भारत ने टोक्यो ओलंपिक के लिए अपनी सबसे बड़ी टीम भेजी। कुल 7 मैडल जीतकर, लंदन 2012 ओलंपिक खेलों में बनाया रिकॉर्ड तोड़ दिया।
 
ओलंपिक गोल्ड जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय, ऐसा करने वाले ट्रैक-एंड-फील्ड में पहले और अपने पहले खेलों में गोल्ड जीतने वाले एकमात्र एथलीट हैं अब नीरज चोपड़ा। 2008 में बीजिंग में 10 मीटर एयर राइफल इवेंट जीतने वाले अभिनव बिंद्रा इससे पहले भारत के एकमात्र ओलंपिक गोल्ड विजेता थे। बिंद्रा 25 साल के थे 2008 बीजिंग खेलों में टॉप मैडल जीतने के समय। देश ने 2012 के लंदन खेलों में हासिल किए 6 मैडल की पिछली सबसे बेहतर गिनती को पीछे छोड़ दिया – इतना ही नहीं, उसमें कोई गोल्ड नहीं था। पहली बार था कि भारत ने इतने अलग अलग खेल में मैडल जीते।
 
इसके साथ इस बात को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि कुछ भारतीय एथलीट चौथे नंबर पर भी रहे यानि कि मैडल के बहुत करीब थे- गोल्फ में अदिति अशोक, कुश्ती में पुरुषों की फ़्रीस्टाइल में 86 किग्रा में दीपक पुनिया और महिला हॉकी टीम। इस तरह सभी एथलीटों ने प्रदर्शन में कोई कमी नहीं रखी पर किस्मत हर किसी के साथ नहीं थी। 
 
इसके अतिरिक्त बिना विवाद एथलीटों ने टोक्यो 2020 ओलंपिक में हिस्सा लिया और बेहतर खेल भावना और अच्छे प्रयासों का प्रदर्शन किया। भारत की पहचान थी कि वे 8 हॉकी गोल्ड जीते हैं।1980 में आखिरी बार जीते थे। इसके बाद, भारत को निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन में ओलंपिक मैडल मिले थे लेकिन एथलेटिक्स, तैराकी और जिमनास्टिक जैसे बड़े खेलों में कोई नहीं। इस बार ये समीकरण भी बदल गया। 2021 के एथलीट, पिछले एथलीटों से बहुत अलग रहे – मकसद सिर्फ ओलंपिक में मौजूद होना ही नहीं था, मैडल का रंग भी पसंद किया।
 

– चरनपाल सिंह सोबती

 

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