Will Olympic be inaugurated on 23rd July even if Pandemic Emergency arise?

ओलंपिक रिंग तो टोकियो बे में वापस ले आए पर सबसे जरूरी था टोकियो वालों का विश्वास जीतना 
 
टोकियो में टोकियो स्काईट्री बिल्डिंग की चमचमाहट ने टोकियो ओलंपिक खेलों के लिए काउंटडाउन तो शरू कर दिया और 25 मार्च 2021 की ओलंपिक मशाल रिले शुरू करने की तारीख भी तय हो गई – फिर भी क्यों ऐसा लग रहा था  कि इस साल भी ओलंपिक नहीं हो पाएंगे। क्या पूरी दुनिया में जो कई मिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं वे बेकार जाएंगे?
 
ये इस साल के शुरू की बात है। खबर थी कि जापान सरकार निजी तौर पर तय कर चुकी है कि टोकियो ओलंपिक को कोरोनॉयरस महामारी के कारण रद्द करना होगा। पूरी दुनिया में द टाइम्स की इस बारे में रिपोर्ट ने खलबली मचा दी।  रिपोर्ट में लिखा था कि अब सरकार का ध्यान, बदले में, अगले उपलब्ध साल 2032 में टोकियो के लिए खेलों को हासिल करने पर है। एक तरफ ऐसी रिपोर्ट तो दूसरी तरफ आयोजकों और जापान सरकार का खुले आम दावा कि खेलों की तैयारियाँ तेजी पर हैं और जापान स्वागत के लिए तैयार है। ओलंपिक ने अपने इतिहास में ऐसा नज़ारा इससे पहले कभी नहीं देखा।
 
असल में ओलंपिक के नई तारीखों में आयोजन पर सवालिया निशान तब लगा जब जापान के प्रधान मंत्री योशीहिदे सुगा ने कोरोनोवायरस मामलों के बढ़ने के बाद टोकियो में  इमरजेंसी की स्थिति घोषित कर दी। दूसरी तरफ उन्होंने 07 जनवरी, 2021 को वायदा दोहराया कि ओलंपिक खेलों का आयोजन  होगा।
तब कई सर्वे हुए – लोग क्या चाहते हैं? निजी तौर पर जापान के लगभग 80 फीसदी लोगों का कहना था कि इस साल के ओलंपिक को रद्द कर दिया जाना चाहिए या इसमें देरी हो सकती है, क्योंकि देश भर में कोरोनोवायरस के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। 35.3 प्रतिशत चाहते थे कि खेलों को रद्द कर दिया जाए और 44.8 प्रतिशत ने एक और स्थगन की बात कही। इंटरनेशनल ओलंपिक  कमेटी और स्थानीय आयोजकों ने भी कह दिया कि एक और स्थगन असंभव है, ओलंपिक रद्द  होंगे या 23 जुलाई को शुरू होंगे।और कोई रास्ता नहीं है।
टोकियो ने 2013 में ओलंपिक की मेजबानी हासिल की थी। तब तो जापान सबसे बेहतर विकल्प था। ऐसे हालत के लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सबसे गलत ये हुआ कि जापान के अपने ही लोग विश्वास खो बैठे थे। जापान में बेचे गए ओलंपिक टिकटों में  से18% तो वापसी के लिए आयोजकों के पास आ गए। लॉटरी से शुरू में बेचे गए कुल 4.45 मिलियन में से 810,000 टिकट वापस आ गए। इनके पैसे की वापसी शुरू हो गई है और कोई देर नहीं की जा रही ताकि लोगों का विश्वास न टूटे।  
 
इस विश्वास को बनाए रखने के लिए ओलंपिक रिंग को भी टोकियो बे में वापस ले आए। रिंग योकोहामा से एक छोटे से क्रूज से टोकियो पहुंचे और इन्हें रेनबो ब्रिज के करीब लगा दिया। पांचों ओलंपिक रिंग टोकियो बे में वापस आ गए हैं – इस खबर को खूब चर्चा दी गई। ओलंपिक के अगले साल तक स्थगित होने के फ़ौरन बाद उन्हें हटा दिया था। रिंग का  नीला, काला, लाल, हरा और पीला रंग खूब चमक रहा है – लगभग 15 मीटर ऊंचे और 33 मीटर लम्बे ये रिंग ओलंपिक उम्मीद के नए प्रतीक हैं। रिंग रात में लाइट में चमकते हैं  – उस उम्मीद के प्रतीक के तौर पर कि 15,400 ओलंपिक और पैरालम्पिक एथलीट सुरक्षित रूप से महामारी के दौरान जापान आ सकते हैं।
 
अब ये सब चर्चा ख़त्म। टोकियो ओलंपिक का उद्घाटन समारोह 23 जुलाई को ओलंपिक स्टेडियम में होगा। कुछ दिन पहले भी पूछा गया – क्या वास्तव में ओलंपिक होंगे? मार्च में, IOC के अध्यक्ष थॉमस बाख ने कहा: “सवाल यह नहीं है कि खेल होंगे या नहीं, सवाल यह है कि ये ओलंपिक खेल कैसे होंगे?”  इस तरह उन्होंने तो कह ही दिया था कि अब खेल और टालने के कोई आसार नहीं। दूसरी ओर सच ये भी है कि जापानी सरकार ने कभी पूरी गारंटी नहीं दी कि खेल होंगे।  हाल के सर्वे में सहमति न देने वालों की आवाज लगभग 80% से घटकर 60% से भी कम हो गई है।
 
इस तरह ये तो लगभग तय है कि ओलंपिक होंगे। यहां तक कि अगर 23 जुलाई को उद्घाटन समारोह के दिन टोकियो में इमरजेंसी की स्थिति बनी रहती है, तो भी। आईओसी के सबसे पुराने सदस्य डिक पाउंड ने कहा कि खेल होंगे – बायो बबल के अंदर। बड़ी सावधानी से बायो बबल की स्कीम बनाई है।
 
– चरनपाल सिंह सोबती 
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