Do you want to know everything about Tokyo Mascot?

मैस्कॉट सबसे पहले बताते हैं  कि टोकियो शहर है ओलंपिक मेजबान   

टोकियो तैयार है ओलंपिक की मेजबानी के लिए- टोकियो पहुंचने पर सबसे पहले ये कैसे पता लगता है ? तैयारियां पूरी हैं भले ही बहस अभी भी जारी है। फिर भी, जब ओलंपिक के लिए टोकियो पहुंचेंगे तो दो जादुई काल्पनिक शख्सियत (एक नीले रंग में और दूसरा गुलाबी रंग में) स्वागत के लिए तैयार मिलेंगे। इनका नाम है मिरिटोवा (Miraitowa) और सोमाइटी (Someity) – ये क्रमशः ओलंपिक और पैरालंपिक (जो टोकियो में हो रहे हैं) के आधिकारिक मैस्कॉट (Mascot – शुभंकर) हैं।
पूरे शहर में इन मैस्कॉट का चेहरा छाया हुआ है पर शहर में वह उत्साह नहीं जो किसी भी ओलंपिक की मेजबानी कर रहे शहर की पहचान हुआ करता है। मिरिटोवा और सोमाइटी, जापानी संस्कृति और ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की भावना दोनों के प्रतीक हैं। दोनों पात्रों में एक एनीमे शैली है और वे बेहद एथलेटिक हैं – वे बास्केटबॉल और टेनिस से लेकर तीरंदाजी, कयाकिंग और घुड़सवारी तक हर खेल में हिस्सा लेते हैं। दोनों दोस्त हैं।  
हालांकि 2020 के टोकियो ओलंपिक को 2021 तक के लिए टाल दिया पर उम्मीद बनी रही कि ओलंपिक होंगे। इस उम्मीद में ख़ास हिस्सेदारी रही शुभंकर मिरिटोवा के मुस्कुराते हुए चेहरे की। अब आइए इनसे मिलते हैं :
मिरिटोवा : ये  मैस्कॉट, एक बिल्ली के समान सुपरहीरो और रोबोट दोनों से मिलता-जुलता है। इसका नाम जापानी शब्द ” मिराई ” (भविष्य) और “टोवा” (अनंत काल) है। “दुनिया भर के लोगों के दिलों में अनंत आशा के भविष्य को बढ़ावा देने के लिए” ये नाम चुना गया।
मिराटोवा की शारीरिक बनावट में टोकियो समर खेलों के प्रतीक के लिए इस्तेमाल, वही इंडिगो ब्लू आइकीमात्सु-पैटर्न (Indigo blue icimatsu-pattern) शामिल है। इसका व्यक्तित्व एक पारंपरिक जापानी कहावत से प्रेरित है जिसका मतलब  है “पुरानी चीजों को अच्छी तरह से सीखना – समझना और उनसे नया ज्ञान प्राप्त करना” जो भविष्य में इसके फोकस के साथ जुड़ने का मौका देगा। मिरिटोवा डिजिटल दुनिया में रहता है, लेकिन इंटरनेट के माध्यम से वास्तविक दुनिया में दिखाई दे सकता है; इसमें तुरंत टेलीपोर्ट करने की शक्ति भी है।
मिरिटोवा को पहली बार मॉडर्न टोकियो के बीच के टोकियो मिडटाउन हिबिया में दिखाया गया था। वहीं नामकरण हुआ। मिरिटोवा ने इसके बाद पुराने टोकियो में असाकुसा में अपने टेलीपोर्टिंग कौशल का प्रदर्शन किया।  
सोमाइटी : ये पैरालंपिक गेम्स का मैस्कॉट है। इसका नाम लोकप्रिय चेरी के पेड़ की विविधता “Someiyoshino” और अंग्रेजी वाक्यांश “बहुत शक्तिशाली” से लिया गया है। इसमें बड़ी एनीमे आंखें और लहजे हैं जो सकुरा चेरी ब्लॉसम की याद दिलाते हैं। इसे कभी-कभी व्हीलचेयर में दर्शाया जाता है।
इस मैस्कॉट में कई सुपरपावर हैं। यह अपने गुलाबी ichimatsu पैटर्न केप का उपयोग करके उड़ सकता है। उसके चेहरे के किनारों पर “चेरी ब्लॉसम स्पर्श सेंसर” या एंटीना इसे टेलीपैथिक संचार, पत्थरों और हवा से बात करने की क्षमता, और बस उन्हें देखकर वस्तुओं को ट्रांसफर करने की क्षमता देता है। इसकी गरिमा और शारीरिक और मानसिक शक्ति ” पैरालंपिक एथलीटों” की “अलौकिक शक्ति” का प्रतिनिधित्व करती है जो बाधाओं को दूर करती है और संभावना की सीमाओं को नए सिरे से लिखती है।
इन्हें एक बड़े ख़ास तरीके से चुना।ओलंपिक इतिहास में पहली बार, प्राइमरी स्कूल के बच्चों ने ओलंपिक खेल के लिए मैस्कॉट चुने।16,769 जापानी प्राइमरी स्कूल में (जापान में और बाहर भी) बच्चों ने वोटिंग में हिस्सा लिया। वोटिंग से पहले, उन्हें मैस्कॉट के अलग अलग डिज़ाइन जोड़े में दिखाए गए। ये डिज़ाइन देने के लिए भी एक मुकाबला हुआ – 18 साल से बड़ी उम्र का कोई भी जापानी राष्ट्रीय या विदेशी इन्हें दे सकता था। सिर्फ डिज़ाइन नहीं, मैस्कॉट के व्यक्तित्व और जापान से संबंध का “प्रोफाइल” भी देना था। टोकियो आयोजन समिति को 2,000 से ज्यादा एंट्री मिलीं।  
बच्चों ने “पेयर ए,” “पेयर बी,” और “पेयर सी” नामक फाइनल के सेट पर वोटिंग की। विजेता जोड़ी को जापानी आर्टिस्ट रायो तानिगुची ने डिजाइन किया है। उसके बाद मैस्कॉट के प्रस्तावित नाम की एक छोटी लिस्ट पर भी वोटिंग हुई।  मैस्कॉट्स का उपयोग मेहमानों का खेलों में स्वागत करने और बच्चों और प्रशंसकों के उत्साह को बढ़ाने के लिए किया जाता है। ये खेल को यादगार बनाते हैं – यहां तक कि खेल ख़त्म हो जाने के बाद भी इन्हें याद रखा जाता है।  
– चरनपाल सिंह सोबती 

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