This raid by an Income Tax officer can get medal for India in Olympics !

ये इनकम टैक्स ऑफिसर टोकियो में बॉक्सिंग के मैडल की दावेदार  हैं!
 

पिछले महीने दुबई में एशियाई एलीट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जैसे ही बॉक्सिंग लीजेंड एमसी मैरी कॉम 51 किग्रा फाइनल में हारीं और सिर्फ सिल्वर उनके हाथ आया तो भारतीय कैंप में मायूसी छा गई थी। कुछ ही देर बाद नज़ारा एकदम बदल गया – पूजा रानी ने 75 किग्रा फाइनल में मावलुदा मोवलोनोवा को हराकर अपना दूसरा एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप गोल्ड जीता। पूजा ने दुबई की इस एशियाई एलीट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारत के लिए पहला  गोल्ड हासिल करने के लिए उज्बेकिस्तान की बॉक्सर को हराया।

 

ये पूजा,टोकियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुकी हैं। 2019 में 81 किग्रा इवेंट में अपना पहला एशियाई बॉक्सिंग गोल्ड जीता था। 2020 में कोरोनो वायरस की वजह से ये चैंपियनशिप नहीं हुई थी। उन्होंने मिडिलवेट वर्ग में एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 2015 में ब्रॉन्ज़ और 2012 में सिल्वर भी जीता था।

 

टीम इंडिया के कोच ने कहा, “इन दो सालों में उसने जो सीखा है, उससे मैं बहुत खुश हूं। फुटवर्क और फिजिकल फिटनेस में सुधार किया है। वह भारत में सबसे बेहतर है लेकिन मेरे लिए यह देखना सबसे जरूरी है कि वह इंटरनेशनल स्तर पर भी सबसे बेहतर हो।” मैरी कॉम के बाद, 30 साल की पूजा, टोकियो में भारत की सबसे अनुभवी महिला बॉक्सर होंगी और कोच बर्गमास्को का मानना है कि वह किसी को भी हरा सकती हैं। ऐसे में अगर नज़र ओलंपिक मैडल पर है तो गलत क्या है ? पूजा  मिडिलवेट बॉक्सर  हैं। ख़ास उपलब्धियां : 
 
*  2014 एशियाई खेल : 75 किग्रा में ब्रॉन्ज़।  
*  दक्षिण एशियाई खेल 2016 : गोल्ड।
*  एशियाई चैम्पियनशिप 75 किग्रा : सिल्वर (2012) और ब्रॉन्ज़ (2015) । 
*  ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 : 75 किग्रा में हिस्सा लिया। 
*  सीनियर महिला नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप : 2010 – ब्रॉन्ज़ , 2011 – सिल्वर , 2012 – गोल्ड , 2013 – गोल्ड , 2015 – गोल्ड।  
*  2016 रियो ओलंपिक : क्वालीफाई करने में नाकामयाब क्योंकि मई 2016 में महिला वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के दूसरे राउंड में हार गई थी ।
*  2020 में टोकियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय बॉक्सर ।

पूजा रानी बूरा  (जन्म :17 फरवरी 1991) हरियाणा के भिवानी जिले के निमरीवाली गांव की रहने वाली हैं। कोच संजय श्योराण ने उन्हें भिवानी के बॉक्सिंग हब में एक स्कूल मुकाबले में देखा तो सीधे अपनी मशहूर एकेडमी में आने के लिए कहा।  इस शहर ने कई इंटरनेशनल बॉक्सर दिए हैं। पूजा को रिंग में लाना बहरहाल एक चुनौती था। वह 18 साल की उम्र में बॉक्सिंग में आई पर उनके पिता को बॉक्सिंग पसंद नहीं थी – वे तो पूजा के चोटिल होने के बारे में सोचने से भी डरते थे। इसलिए महीनों तक पूजा ने ट्रेनिंग को परिवार से छिपा कर रखा – कोई चोट लग जाए तो  दोस्तों के साथ रह जाती थी ।
 

2009 में, बॉक्सर के तौर पर शुरुआत के एक साल के अंदर ही पूजा ने यूथ नेशनल चैंपियनशिप में जीत हासिल कर ली थी – हरियाणा की एक टॉप बॉक्सर प्रीति बेनीवाल को हराकर सिल्वर जीता। इस मैडल ने सब कुछ बदल दिया। उसके माता-पिता ने पूरा साथ देना शुरू कर दिया और वह मैडल जीतने लगी। 2016 ओलंपिक के लिए जगह न बना पाना उनके करियर का सबसे निराशा वाला दौर था पर टोकियो के लिए क्वालीफाई करने वाली भारत की पहली महिला बॉक्सर बनकर उस निराशा की भरपाई कर दी।  
 
भारत की एक मैडल की सबसे बड़ी उम्मीद में से एक पूजा हरियाणा सरकार में इनकम टैक्स ऑफिसर हैं।
 
– चरनपाल सिंह सोबती 
Feature image-pixabay
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