This boy had created his email ID with Olympic in it @12 now qualifies for Tokyo !

टोकियो जा रहे श्रीशंकर ने तो 12 साल की उम्र में अपने ईमेल आईडी में ओलंपिक लिख लिया था 


ये इस साल मार्च के महीने की बात है। NIS पटियाला में इंडियन ग्रां प्री मीट में मुरली श्रीशंकर कमाल की फार्म में थे – हर जम्प 8 मीटर से आगे और लगातार बेहतर दूरी। अब पांचवीं जम्प – इस बार श्रीशंकर ने 8.26 मीटर की छलांग लगा दी। 8.02, 8.04, 8.07 और  8.09 और इसके बाद 8.26 मीटर। इसी के साथ टोकियो ओलंपिक क्वालीफाइंग मार्क 8.22 मीटर पार हो गया। केरल के एथलीट एकमात्र भारतीय लॉन्ग जम्पर हैं जिन्होंने इस साल के खेलों के लिए अब तक क्वालीफाई किया है। 8.26 मीटर कितनी बेहतर और अच्छी छलांग है इसका अंदाज़ा लीजिए :
 
*  2016 रियो ओलंपिक में वे नंबर 4 रहते। लंदन ओलंपिक में सिल्वर जीत लेते।
*  पिछला नेशनल रिकॉर्ड 8.20 मीटर था जो 2018 में भुवनेश्वर में ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में श्रीशंकर ने ही बनाया था।  
*  इस साल इतनी लंबी जम्प लगाने वाले दुनिया में सिर्फ तीसरे एथलीट। 
*  इस छलांग ने उन्हें किसी भी एशियाई खेल में गोल्ड दिला दिया होता क्योंकि रिकॉर्ड 8.24 मीटर है जो चीन के 2015 वर्ल्ड ब्रॉन्ज़ विजेता वांग जियान ने बनाया।
*  इस तरह अब श्रीशंकर एशिया में टॉप हैं।  
 
ऐसा नहीं है कि वे एकदम चमके हैं – सच ये है कि उन पर वह ध्यान ही नहीं दिया गया जो जरूरी था। वे भारत के सबसे प्रतिभाशाली एथलीट में से एक हैं। एक झलक :
  
*  2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स : एपेंडिसाइटिस के कारण आखिरी समय पर नाम वापस लिया। इससे वजन कम हुआ और फिट होना मुश्किल।
*  जकार्ता एशियाई खेल: साधारण प्रदर्शन।
*  सितंबर 2018 भुवनेश्वर नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप : 2019 दोहा वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करने के लिए 8.20 मीटर मार्क को हासिल करते हुए नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा। 
*  2019 दोहा वर्ल्ड चैंपियनशिप : बड़े बड़े एथलीट के सामने घबरा से गए। सिर्फ 7.62 मीटर की छलांग लगाई।
 
पहले और आज तक कोच – उनके पिता एस मुरली हैं। 22 साल के श्रीशंकर ने मुरली के साथ अपने शहर पलक्कड़ को ट्रेनिंग के लिए चुना – उनका बस यही मानना रहा कि उनके पिता ही जानते हैं कि उनसे कैसे और बेहतर प्रदर्शन कराया जाए। ये ठीक है कि वे खुद इंटरनेशनल ट्रिपल जम्पर रहे पर मौजूदा दौर में किसी विदेशी/ आधुनिक कोच के साथ श्रीशंकर के प्रदर्शन को एकदम और बेहतर किया जा सकता था। फेडरेशन के विदेशी कोच जोड़ने के किसी भी प्रस्ताव पर वे नहीं माने। श्रीशंकर साफ़ कहते हैं कि वे साबित करना चाहते हैं कि उनके लिए पिता से बेहतर कोच और कोई नहीं। पिता ने मेहनत की, अपने बेटे के ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का सपना देखा और उनका योगदान कमाल का है। वैसे श्रीशंकर के परिवार में एथलेटिक्स ही रगों में बहती है – उनकी मां के एस बिजिमोल 800 मीटर रेसर थीं और बहन हेप्टाथलीट है।
 
कमाल देखिए – श्रीशंकर में बचपन से ही ओलंपिक में हिस्सा लेने का जुनून रहा है। यहां तक कि 2012 में अपनी जो पहली ई-मेल आईडी बनाई थी उसमें ओलंपिक शब्द लिखा था। ऐसा जुनून और अब सपना सच हो रहा है। इस कामयाबी के लिए उन्हें पढ़ाई की कीमत देनी पड़ी। एक अच्छा स्टूडेंट होने के बावजूद इंजीनियरिंग और एमबीबीएस दोनों को छोड़ना पड़ा। वह इंजीनियरिंग में पहले सेमेस्टर में टॉपर थे लेकिन पढ़ाई जारी नहीं रख पाए। एमबीबीएस की कोशिश की – वहां भी यही हुआ। अब एक सरकारी कॉलेज से बीएससी (मैथ्स) कर रहे हैं। WWE के जबरदस्त फैन हैं।  
ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले आखिरी भारतीय पुरुष लॉन्ग जम्पर 2016 रियो खेलों के लिए अंकित शर्मा थे। इससे पहले संजय के राय ने 2000 सिडनी, 1976 मॉन्ट्रियल में टीसी योहानन और 1948 लंदन ओलंपिक के फाइनल में पहुंचने वाले बलदेव सिंह ने मुकाबला किया था।
अगर 2019 मुश्किल साल था तो 2020 कोविड का साल था। 2021 में साबित करने का मौका मिला और अब नज़र टोकियो पर है। वैसे पिता और कोच मुरली का कहना है कि उनका बेटा 2024 में पेरिस ओलंपिक में पोडियम पर जगह के लिए सबसे अच्छी तरह तैयार होगा।
– चरनपाल सिंह सोबती

 

– चरनपाल सिंह सोबती

Show Buttons
Hide Buttons