This Indian Woman is Grand Slam winner but not won any Olympic Medal !

सानिया मिर्जा:  ग्रैंड स्लैम जीत लिए पर ओलंपिक मैडल की हसरत अधूरी है 

लगभग 34 साल की सानिया मिर्ज़ा को विश्वास है कि उनके पास टेनिस में कुछ साल बचे हैं। इन सालों के लिए उनकी सबसे बड़ी हसरत- ओलंपिक मैडल जीतने से बेहतर और कुछ नहीं। इसके लिए उनके पास आखिरी मौका टोकियो में है। सानिया ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं छोड़ रहीं। रोजाना चार घंटे तक की ट्रेनिंग- ‘ मैं टोकियो में मैडल के साथ अपने टेनिस करियर की एक बड़ी कामयाबी हासिल करना चाहती हूँ।’ 
 
1 अप्रैल, 2001 को सानिया मिर्ज़ा ने 14 साल की उम्र में चंडीगढ़ में एक ITF इवेंट में सीनियर सर्किट पर अपनी शुरुआत की थी। टूर्नामेंट में वाइल्ड कार्ड एंट्री थीं। मुकाबला सीनियर गीता मनोहर से था पर सानिया ने मैच 6-0, 6-1 से जीता और अपने करियर की शुरुआत की। भारत की इस सबसे बेहतरीन महिला टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा के नाम कई ख़ास उपलब्धियां  हैं। ऐसी पहली भारतीय महिला जिसने :
* डब्ल्यूटीए टाइटल जीता।  
* डब्ल्यूटीए डबल्स रैंकिंग में नंबर 1 पर पहुंचीं। 
* डब्ल्यूटीए सिंगल्स रैंकिंग में टॉप 30 में आईं।  
* ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली भारतीय महिला।  
 
ओलंपिक उनके लिए नए नहीं- वे अपने चौथे ओलंपिक में हिस्सा लेने टोकियो जा रही हैं। 2016 में ओलंपिक मैडल जीतने की हसरत के सबसे करीब थीं- ब्रॉन्ज़ के प्ले-ऑफ मैच में मिली हार अभी तक भूली नहीं हैं। तब मिक्स्ड डबल्स में 6-1,7-5 से हार का सामना करना पड़ा था – उनके पार्टनर रोहन बोपन्ना थे। सानिया मिर्ज़ा के लिए ओलंपिक में शुरुआत बीजिंग 2008 में हुई थी। ओलंपिक मंच पर पहला इम्तहान 11 अगस्त, 2008 को महिला सिंगल्स में था। 21साल की सानिया के लिए तब बड़ा मुश्किल ड्रॉ हिस्से में आया था- चेक इवेता बेनेसोवा का सामना किया, जो उनसे कहीं बेहतर रैंक की खिलाड़ी थी।
 
कोविड ने भी उनकी ट्रेनिंग को नहीं रोका। सानिया अक्टूबर 2018 में मां बनीं और पिछले साल, बेटे (इज़हान) के जन्म के बाद वापसी की। ऑस्ट्रेलिया में एक डब्ल्यूटीए टूर्नामेंट को जीता और स्लोवेनियाई आंद्रेजा क्लेपैक के साथ कतर ओपन में महिला डबल्स के सेमीफाइनल में पहुंचीं।
 
भारत को उनसे एक मैडल की पूरी उम्मीद है तभी तो उन्हें फिर से TOPS में शामिल कर लिया- चोट के कारण 2017 में इस स्कीम से बाहर हो गई थीं। अब टोकियो की तैयारी और ट्रेनिंग के लिए पैसे की कोई कमी नहीं।डबल्स रैंकिंग में वे इस समय 156 वें नंबर पर हैं।अक्टूबर 2017 में जब डब्ल्यूटीए टूर छोड़ा था तो नंबर 9 थीं।डब्ल्यूटीए के नियमों के हिसाब से उनकी ये रैंकिंग अभी तक उनके नाम पर रिज़र्व है- अक्टूबर 2021 तक। इसी का फायदा ये है कि टोकियो के लिए अपना मनपसंद डबल्स पार्टनर चुन सकती हैं – टॉप 300 में से और अगर टॉप 10 में से किसी को पार्टनर बना लिया तो सीधे डबल्स ड्रा में 32 में जगह मिल जाती है।  
 
लगभग दो डिकेड के करियर में बस ओलंपिक मैडल की कमी है। ओलंपिक में कामयाबी के साथ वे महिलाओं को दिखाना चाहती हैं कि अपने सपनों को पूरा करने का इरादा कभी मत छोड़ो।मां बनना किसी भी इरादे में कतई रूकावट नहीं है।
 
– चरनपाल सिंह सोबती
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