This 5 ft 2 inch Boxer is known as Pocket Dynamo and Olympics hope !

पॉकेट डायनेमो’  जिसे लंबू बॉक्सर से मुकाबले में डर नहीं लगता 
 
कोई सिर्फ 5 फुट 2 इंच लंबा बॉक्सर ओलंपिक में मैडल जीतने की उम्मीद कैसे लगा सकता है? अगर इस सवाल को  भारत के अमित पंघाल पर लागू कर दें तो जवाब मिलेगा कि ये सोच गलत है। 5 फुट 2 इंच की लंबाई ने उन्हें ‘पॉकेट डायनेमो’ का नाम जरूर दिलाया पर वे टोकियो में भारत की एक मैडल जीतने की उम्मीद हैं।खुद छोटे कद के और मुकाबले के लिए उन जैसा कोई नहीं मिला तो अपने से लंबों से मुकाबला करते रहे और आज यही उनका प्लस पॉइंट है।  
 
ये कहानी रोहतक शहर में शुरू हुई। बड़े भाई अजय बॉक्सर और वहां की छोटूराम बॉक्सिंग एकेडमी में ट्रेनिंग लेते थे। उन्होंने अमित को भी एंट्री दिला दी। कोच अनिल धनखड़ बड़ी मुश्किल में फँस गए- अमित (उम्र 12 साल और वजन 24 किलो) जैसा दूसरा, नाजुक और छोटा, बॉक्सर कहाँ से लाएं? नतीजा- उन्हें बड़े लड़कों के सामने रिंग में उतार दिया।इससे अमित वह मूव सीख गए जो दूसरे बॉक्सर कभी सीख नहीं पाते। इसके बाद गुड़गांव के कॉम्बैट बॉक्सिंग क्लब में चले गए बेहतर ट्रेनिंग के लिए और संयोग से कोच धनकर भी वहीं आ गए। इन कोशिशों और तकनीक ने अमित को एक बेहतर बॉक्सर बना दिया और कामयाबी मिली। देखिए :
 
* 14 साल की उम्र में : महाराष्ट्र में सब-जूनियर चैंपियनशिप में गोल्ड।
* 2017 : जूनियर सर्किट में कामयाबी के बाद सीनियर चैंपियनशिप में हिस्सा लेना शुरू कर दिया और जल्दी ही नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर अपनी पहचान बनाई।
* 2017 एशियाई चैंपियनशिप : ब्रॉन्ज़, सेमीफाइनल में उज्बेकिस्तान के रियो ओलंपिक चैंपियन हसनबॉय दुस्मातोव से हारे।
* 2018 कॉमनवेल्थ खेल : सिल्वर मैडल।
* 2018 एशियाई खेल : गोल्ड मैडल- उज्बेकिस्तान के रियो ओलंपिक चैंपियन हसनबॉय दुस्मातोव को फाइनल में हराया। ये खेल भारत के लिए बहुत बड़ी कामयाबी थे- 70 मैडल जीते जिसमें 16 गोल्ड थे और इनमें से एक गोल्ड अमित का था।  
* 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप : सिल्वर मैडल- किसी भी भारतीय का पहला और इसी के साथ टोकियो ओलंपिक में जगह पक्की।
 
अब उम्र 25+ साल और इरादा पक्का। उनके करियर का ग्राफ एकदम ऊपर तब गया जब ओलंपिक चैंपियन हसनबॉय को हराया। इस समय अमित दुनिया के नंबर 1 फ्लाईवेट बॉक्सर हैं।  ये मानने वालों की कमी नहीं कि अभी भी उनका सबसे तकड़ा मुकाबला ओलंपिक चैंपियन हसनबॉय से है। हसनबॉय पर जीत के एक साल बाद, अमित ट्रांसफर लेकर 48 कि ग्रा से 52 किग्रा (फ्लाईवेट) में आ गए पर मजेदार ये हुआ कि हसनबॉय ने भी यही बदलाव कर लिया यानि कि आपसी मुकाबला ख़त्म नहीं हुआ है।असल में 48 कि ग्रा के लिए टोकियो में एंट्री नहीं थी।  
 
एक साधारण किसान परिवार में जन्मे- 6 अक्टूबर 1995 को हरियाणा के रोहतक जिले के मयना गाँव में। पिता विजेंद्र सिंह पंघाल, किसान और उनकी खेती की आमदनी अमित की ट्रेनिंग का खर्च नहीं उठा पा रही थी।अमित इस बात को भूलते नहीं कि उनकी बॉक्सिंग ट्रेनिंग की खातिर बड़े भाई ने 2011 में बॉक्सिंग छोड़ दी और परिवार एवं अमित की ट्रेनिंग में मदद के लिए आर्मी में चले गए। भाई के इस एक्शन ने उनका इरादा और मजबूत कर दिया। अभी भी अपने भाई को वे अपना मेंटोर मानते हैं- हर बड़े मुकाबले से पहले उनसे सलाह लेते हैं और उन्हें अपना ‘सर्वश्रेष्ठ कोच’ कहते हैं।इस समय अमित भी आर्मी में हैं। 
 
टोकियो जाने से पहले उनकी सबसे बड़ी जीत जर्मनी के कोलोन वर्ल्ड कप में है- वहां गोल्ड जीता। जर्मन बॉक्सर अर्गिष्टी टेरेटेरियन ने फाइनल में वॉकओवर दिया था। टोकियो में बहरहाल अमित और ओलंपिक मैडल के बीच सबसे बड़ी चुनौती ज़ोइरोव को मान रहे हैं। वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर 2, ज़ोइरोव अपनी ओलंपिक कामयाबी के बाद पेशेवर बॉक्सिंग में चले गए थे पर अब लौट आए हैं- नए जोश और ताकत के साथ।
– चरनपाल सिंह सोबती
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