Coach refused to train her-Now she is only Gymnast of India in Tokyo Olympics !

जिसे कोच पतला और कमज़ोर कहकर ट्रेनिंग देने इंकार कर दिया था – अब वह प्रणति टोकियो में भारत की अकेली जिमनास्ट होगी 

कितनी मजेदार बात है कि जिमनास्ट प्रणति नायक तो 2022 के कामनवेल्थ खेलों की तैयारी कर रही थी- क्वालिफाई कर गई टोकियो ओलंपिक के लिए। ओलंपिक शुरू होने से सिर्फ तीन महीने पहले अगर कोई अचानक ही ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर जाए तो कैसा महसूस होगा? ये कहानी है जिमनास्ट प्रणति की जो रिज़र्व एशियाई कोटे से क्वालिफाई कर गई।

 
पश्चिम बंगाल के मिदनापुर की 26 साल प्रणति एशियाई कोटे के लिए श्रीलंका की एलपिटिया बैजल डोना से मुकाबला कर रही थी – जैसे ही इस महीने की सीनियर एशियन चैंपियनशिप रद्द हुई तो प्रणति की किस्मत चमक गई। उसने कोशिश तो की थी 2019 वर्ल्ड चैम्पियनशिप के दौरान पर तब क्वालिफाइंग स्कोर हासिल नहीं कर सकी थी। प्रणति की लंबे समय से कोच मीनारा बेगम (जो SAI से 2019 में रिटायर हुई थीं) इस खबर पर इतनी खुश हैं मानो उन्होंने खुद क्वालिफाई कर लिया हो। पिछले दो साल से SAI कोच लखन मनोहर शर्मा ट्रेनिंग दे रहे हैं।
 
2018 एशियाई खेलों तक वे TOPS स्कीम में थीं – अब जब कि ओलंपिक के लिए क्वालिफाई  कर लिया है तो उन्हें उम्मीद है इस स्कीम में वापसी की। कोच भी जुट गए हैं उनकी ख़ास ट्रेनिंग में। ये तो तय है कि अब ओलंपिक के लिए कड़ी मेहनत करनी  होगी पर अगर प्रणति की असल कहानी पढ़ें तो लगेगा कि उनके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं। देखिए : मोबाइल से दूर कर दिया – सिर्फ शनिवार / इतवार मिलता है , एक फिजियो, मालिशिया और डाइट विशेषज्ञ लगा दिए गए हैं एक साथ। 
 
ये वही प्रणति है जिसे 8 साल की उम्र में एक कोच ने बहुत पतला होने के कारण ट्रेनिंग देने से इंकार कर दिया था। कोलकाता के SAI ट्रेनिंग सेंटर में कोच ने ट्रेनिंग में नहीं लिया तो पिता सुमंत नायक रो पड़े थे। गिड़गिड़ाए पर कोच नहीं माने। वहां इक्विपमेंट साफ़ करने वाले एक असिस्टेंट दिलीप तब उन्हें सेंटर की सीनियर अधिकारी सुष्मिता के पास ले गए। सुष्मिता ने बात मान ली और ड्यूटी लगा दी कोच मिनारा बेगम की और अब वे उनकी जिम्मेदारी बन गईं। गड़बड़ ये हुई कि हॉस्टल में जगह नहीं मिली- हर रोज़ पिता के साथ 100 किमी  सफर, ट्रेनिंग लेने के लिए। कोच ने देखा पतली है – कमज़ोर नहीं। हॉस्टल न मिलने से अच्छी डाइट वाला मामला भी गड़बड़ा गया। आज वही प्रणति, रियो में नंबर 4 रही, दीपा करमाकर ने जो शुरूआत की उसे और आगे ले जाना चाहती हैं।
  
शुरुआत ऐसे हुई कि सुमंत नायक और उनकी पत्नी प्रतिमा ने देखा कि उनकी ये बेटी घर में टिकती ही नहीं। हर वक़्त जिम्नास्टिक का भूत सवार। बेटी की हसरत पूरी करने के लिए पिता ने झारखंड छोड़ दिया और बंगाल चले गए। बस ड्राइवर बन गए। उन्हें भरोसा था ये बेटी नाम कमाएगी। 2017 तक रोडवेज में ड्राइवर रहे। उसके बाद एक छोटी नौकरी की। आज उसी प्रणति ने घर बनवा दिया, बड़ी बहन की शादी में भी मदद की। साथ में उनका सफर :    

*  पहला मैडल रशिया में चिल्ड्रन एशियाड में।  
 * 2014 एशियाई खेल : दीपा के साथ लगभग सेमी फाइनल में। 
* 2019 में एशियन  आर्टिस्टिक जिमनास्टिक चैंपियनशिप ( Asian Artistic Gymnastic Championships) : ब्रॉन्ज़। 
 
क्या ओलंपिक मैडल के साथ इतिहास बनेगा ?
 
– चरनपाल सिंह सोबती
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