Will Hockey give gold to India in Tokyo ?

एक दौर था जब ओलंपिक हॉकी गोल्ड पर भारत का ही नाम होता था – आज बात ज़ोरदार दावेदार होने की होती है 
 
आज भारत में , आम तौर पर , क्रिकेट की दीवानगी के माहौल में सभी ये भूल ही चुके हैं कि भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी है। अगर बड़ी बड़ी जीत नहीं मिलेंगी, ओलंपिक के लिए 
क्वालिफाई करना ही चुनौती बन जाएगा तो ऐसा होना हैरानी की बात नहीं।  हमेशा ऐसा नहीं था। 
 
पुरुष हॉकी में भारत ओलंपिक में अब तक की सबसे कामयाब  टीम है – 8 गोल्ड जीते हैं (1928, 1932, 1936, 1948, 1952, 1956, 1964, 1980 में ) । ओलंपिक में सबसे बेहतर रिकॉर्ड  भी भारत का है – 126 मैच में से 77 में जीत मिली। फिर भी सच ये है कि 1980 के बाद गोल्ड जीतना तो दूर, कोई भी मैडल नहीं जीता।  
 
महिला हॉकी में सबसे बेहतर प्रदर्शन 1980 के मॉस्को ओलंपिक का है – जहां चौथे नंबर पर रहे। इसी साल से ओलंपिक में महिला हॉकी गोल्ड का मुकाबला शुरू हुआ था। भारत ने प्रगति दर्ज़ करने की जगह ग्राफ नीचे गिरते देखा और उसके बाद कहीं 2016 के रियो डी जनेरियो ओलंपिक के लिए ही क्वालिफाई कर पाए और 12 वें नंबर पर रहे।  
 
हाल के सालों के इस ओलंपिक रिकॉर्ड को देखते हुए , इस बार इन दोनों हॉकी मुकाबलों में क्या उम्मीद लगाएं ? सच ये है कि इस बार भारत की  पुरुष और महिला हॉकी टीम का नाम दावेदारों में लिया जा रहा है – ओलंपिक में पोडियम फिनिश के लिए। भले ही कोविड -19 ने पिछले साल खेलों पर बड़ा असर डाला पर दोनों पुरुष और महिला टीम SAI सेंटर, बैंगलोर में नेशनल कैंप में रहीं – लॉक डाउन के दौरान अपनी फिटनेस और तकनीक को बेहतर बनाने की कोशिश की।

भारतीय महिला हॉकी टीम 
 
कप्तान रानी की टीम ने 2019 में टोकियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था यानि कि पहली बार बैक-टू-बैक ओलंपिक इवेंट में खेल रही हैं। रियो 2016 का अनुभव काम आएगा – चीफ कोच सोज़र्ड मैरिजेन को उससे बेहतर रिकॉर्ड का पूरा भरोसा है। टीम ने इस साल की शुरुआत में वर्ल्ड नंबर 2 अर्जेंटीना और जर्मनी के खिलाफ उत्साही प्रदर्शन किया। टोकियो ओलंपिक के ग्रुप ए में मुकाबले में जर्मनी, ग्रेट ब्रिटेन, आयरलैंड, नीदरलैंड और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। रानी ने कहा – ‘अर्जेंटीना और जर्मनी के खिलाफ टीम ने जो  मुकाबला किया उससे मैं खुश हूं – भले ही एक भी जीत दर्ज नहीं कर पाए। हमने दिखाया कि टॉप रैंक टीम के खिलाफ मुकाबला कर सकते हैं।’
 
भारतीय पुरुष हॉकी टीम 
 
मनप्रीत सिंह की टीम में युवा जोश और अनुभव का अच्छा मिश्रण है। एफआईएच हॉकी प्रो लीग में पिछले साल के अच्छे प्रदर्शन को जारी रखा है-  अर्जेंटीना टूर के दौरान ओलंपिक चैंपियन को कड़ी टक्कर दी। साल  की शुरुआत में यूरोप टूर चीफ कोच ग्राहम रीड की स्कीम का ख़ास हिस्सा था। टोकियो ओलंपिक में ग्रुप ए में भारत के विरोधियों में मेजबान जापान, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और स्पेन शामिल हैं।

मनप्रीत ने कहा – ‘ लंबे समय के बाद इंटरनेशनल हॉकी खेलना बड़ा अच्छा रहा। मैं पिछले 18 महीनों में टीम की प्रगति से बड़ा खुश हूँ। अगर इसे जारी रखते हैं, तो मुझे यकीन है कि  किसी भी टीम को हरा सकते हैं।’
 
कोच ग्राहम रीड कहते हैं कि ओलंपिक मैडल के स्तर से भारत 20 प्रतिशत दूर है पर सही रास्ते पर है।हॉकी इंडिया की भी तारीफ करनी होगी कि इन मुश्किल हालत में (जिनमें कैंप में कुछ खिलाड़ी कोविड की चपेट में भी आए) खेल को रुकने नहीं दिया – यहाँ तक कि यूरोप टूर पर भी भेजा दोनों टीम को ताकि अच्छी मैच प्रैक्टिस हासिल करें। ओलंपिक मैडल से अगर सिर्फ 20 प्रतिशत दूर तो क्यों न खिलाड़ी जान लगा दें ?

– चरनपाल सिंह सोबती