Wanted to be cricketer now discus throw medal aspirations at Tokyo!

कमलप्रीत कौर : क्रिकेटर बनना चाहती थी, शुरुआत शॉट पुट से हुई और अब टोकियो में डिस्कस थ्रो के मैडल की दावेदार

 कमलप्रीत कौर ने पटियाला में एथलेटिक्स फेडरेशन कप के दौरान डिस्कस थ्रो में 65.06 मीटर का नेशनल रिकॉर्ड बनाने वाली थ्रो के साथ टोकियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया। ये कोई मामूली थ्रो नहीं है। आप खुद देखिए :* नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया (पिछला रिकॉर्ड : कृष्णा पुनिया ,2012 में, 64.76 मीटर) ।  * ओलंपिक क्वालिफाइंग बेंचमार्क 63.5 मीटर है।    * 2014 एशियाई खेलों में गोल्ड विजेता सीमा पुनिया नंबर 2 रही 62.64 मीटर की थ्रो के साथ। 
* 2019 के इसी फेडरेशन कप में 60.25 मीटर थ्रो के साथ गोल्ड जीता था।* किसी भी भारतीय महिला की 65+ मीटर की पहली डिस्कस थ्रो।   
ऐसी बेहतर कोशिश के साथ क्वालिफाई करने के लिए कमलप्रीत बधाई की हक़दार हैं। ये मानने वालों की कमी नहीं कि कमलप्रीत टोकियो में मैडल की हकदार हैं। इवेंट से पहले घबराहट और जोश में वह तीन रात सो नहीं सकी थी। कौन हैं ये कमलप्रीत कौर? ये किस्सा शुरू होता है पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब जिले के मलोट-अबोहर नेशनल हाईवे पर कबरवाला गाँव से (कई जगह बादल गाँव लिखा है जो गलत है)। पढ़ाई में कतई दिलचस्पी नहीं और मुश्किल से पास होती थी। पढ़ाई से बचने के लिए स्पोर्ट्स में आ गई। लंबी होने का फायदा मिला – तब 5 फुट 9 इंच थीं और अब यह 6 फुट है। क्रिकेटर बनना चाहती थी पर स्कूल के पीटी टीचर के कहने पर 2012 में शॉट पुट में हिस्सा लिया-  स्टेट मीट में चौथे नंबर पर। इस पर स्पोर्ट्स को गंभीरता से लेना शुरू किया। पास के बादल गांव में SAI का सेंटर है और वहां पहुंच गई। वहां कहा गया डिस्कस थ्रो की ट्रेनिंग लो।SAI हॉस्टल में सीट नहीं मिली तो दशमेश गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल के हॉस्टल में डाल दिया – वहीं से इंटरमीडिएट की। गड़बड़ ये थी कि SAI की ट्रेनिंग के लिए जरूरी डाइट स्कूल हॉस्टल में कहाँ से मिलती?  बहरहाल जल्द ही नतीजा सामने आने लगा :  * 2013 में बैंगलोर में जूनियर चैंपियनशिप : ब्रॉन्ज़ मैडल।  
* 2016 में अंडर 18 और अंडर 20 में नेशनल चैंपियन।  * 2017 में ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी रिकॉर्ड (जो 2001 से चला आ रहा था) तोड़ा। इसके बाद ताइपे में यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए चुना गया। 2017 में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स (World University Games) में 6 वें नंबर पर।* 2018 एशियाई खेल : क्वालिफाई करने में नाकामयाब और इस निराशा में स्पोर्ट्स से हटने का इरादा बना लिया था। 
* 2019 में दोहा एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पांचवें नंबर पर ।

कमलप्रीत भारतीय रेलवे में क्लर्क हैं और नेशनल चैंपियनशिप में उन्हीं का प्रतिनिधित्व करती हैं। इतनी उपलब्धियां पर थोड़ी निराश भी है। पंजाब सरकार से कोई मदद नहीं मिलती – शायद इसलिए कि वह रेलवे का प्रतिनिधित्व करती हैं। एक किसान परिवार से हैं, साधन कोई ख़ास नहीं, उस पर घर में ट्रेनिंग और बेहतर डाइट का खर्चा। रेलवे में क्लर्क की सेलेरी  लगभग 21 हज़ार रूपए पर 2019 में गोस्पोर्ट्स फाउंडेशन ने स्पांसर किया तो आसानी हुई।अब तक TOPS स्कीम में भी उनका नाम नहीं है।अगर ज़िंदगी सामान्य  रास्ते  पर चलती तो कमलप्रीत अब तक शादी कर चुकी होती पर अपने ओलंपिक सपने को ज़िंदा रखने के लिए हर मुश्किल का सामना किया। एक बार जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल विजेता नवजीत कौर को देखा- सभी उनके ऑटोग्राफ ले रहे थे। इस पर उनके अंदर भी चाह पैदा हुई कि एक दिन ऐसे ही उनसे भी सभी ऑटोग्राफ मांगें।  इस समय उनके कोच बलजीत सिंह हैं और उनका मानना है कि कमलप्रीत में 68 मीटर की थ्रो का दम और टेलेंट है। चिंता है फाउल थ्रो की- पटियाला में भी अपनी चार में से सिर्फ एक थ्रो सही फेंकी।लॉक डाउन के दौरान ट्रेनिंग के अपने नए तरीकों से ही वह खुद को फिट रख पाई- बॉक्स भरे डबल बेड को वजन के तौर पर उठाना और डम्बल की जगह गमले। कोच ने कहा खेतों में भागो। अब सपना है ओलंपिक में मेडल जीतना।

चरनपाल सिंह सोबती

SPORTSNASHA
www.sportsnasha.com is a venture of SRC SPORTSNASHA ADVISORS PVT LTD. It is a website dedicated to all sports at all levels. The mission of website is to promote grass root sports.
http://www.sportsnasha.com