This Indian is just 19 and will be contender for Olympic Medal in Shooting !

राजस्थान की जमीं से आया एक और निशानेबाज़ – उसका कमाल टोकियो में देखेंगे !
राजस्थान की जमीं ने भारत को राज्यवर्धन सिंह राठौर, कर्णी सिंह, ओम प्रकाश मिठारवाल और अपूर्वी चंदेला जैसे निशनेबाज़ दिए हैं- इस लिस्ट में एक और नाम दिव्यांश सिंह पंवार का है। दिव्यांश क्वालिफाई कर चुके हैं टोकियो ओलंपिक के लिए। दिव्यांश का नाम ज्यादा चर्चा में नहीं पर सच ये है कि नेशनल सेलेक्शन ट्रायल में 10 मीटर एयर राइफल टी 4 इवेंट जीतने के लिए 253.1 के स्कोर के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड  तोड़ दिया। 
 
अभी भी लंबाई बढ़ने का सिलसिला जारी है- इस वर्ल्ड नंबर 1 एयर-राइफल शूटर ने पिछले लगभग 6 महीने में जिस ड्रेस के साथ प्रैक्टिस की- उसे अब बदलने की नौबत आ गई है। एक शूटर के लिए ड्रेस की सही फिटिंग और उसके साथ सही बेलेंस बड़ा जरूरी होता है। 6 फुट लंबाई है उनकी। दिव्यांश के कोच दीपक दुबे कहते हैं कि वैसे भी एक आम शूटर की तुलना में दिव्यांश निशाना लगते हुए पीठ को ज्यादा झुका लेते हैं – इसलिए उन्हें पीठ की तकलीफ से बचाने के लिए कुछ ख़ास एक्सरसाइज करनी पड़ती हैं। 

आपको ये जानकार हैरानी होगी कि दिव्यांश ने तो बीजिंग 2019 ISSF वर्ल्ड कप में 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में सिल्वर जीतकर ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया था।अगर कोरोनावायरस महामारी ने टोकियो खेलों को स्थगित न किया होता तो वे तो 18 साल की उम्र से भी पहले ओलंपियन होते ।
 
दिव्यांश के लिए ये सब कैसे शुरू हुआ? दिव्यांश का जन्म 19 अक्टूबर 2002 ( कई जगह ये 02 अक्टूबर1998 लिखी है जो गलत है ) को हुआ – पिता जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में डॉक्टर और मां एक योग्य नर्स।12 साल की उम्र में शूटिंग प्रैक्टिस शुरू कर दी- अपनी बड़ी बहन अंजलि के इक्विपमेंट के साथ जयपुर के जंगपुरा शूटिंग रेंज में। 2017 में दिल्ली आ गए। कहते है उन्हें PUBG गेम्स खेलने की लत लग गई थी और इसे छुड़ाने के लिए पिता अशोक पंवार ने उन्हें दीपक कुमार दुबे के पास ट्रेनिंग के लिए कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में भेज दिया। यहां नई राइफल और एक जोड़ी जूते मिले।बचपन से ही शूटिंग में दिलचस्पी थी – पिता दीवार पर निशाना साधते थे और वे उन पर प्लास्टिक की बंदूक से गोली चलाते थे।
 
2017 में जब 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में जूनियर और यूथ दोनों का टाइटल जीता तो देश में खूब नाम चमका – नेशनल सेलेक्शन ट्रायल्स 1 और 2 में । फरवरी 2019 में दिल्ली में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में जब पहली बार सीनियर्स के मुकाबले में हिस्सा लिया तो झटका लगा और समझ में आ गया कि यहां मुकाबला इतना आसान नहीं। 627.2 स्कोर के साथ क्वालिफिकेशन में 12 वें नंबर पर रहे। समझ में आ गया कि सिर्फ सही निशाना नहीं, दिमागी मजबूती भी चाहिए।अब तक इस तरफ उस पहलू पर काम नहीं किया था । 

अपने अब तक के करियर में दिव्यांश ने इंटरनेशनल मुकाबलों में 6 गोल्ड, 2 सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़ जीते हैं।

* 2018 में जर्मनी के सुहेल में आईएसएसएफ जूनियर वर्ल्ड कप : दिव्यांश, हृदय हजारिका और शाहू माने की तिकड़ी ने जूनियर टीम 10 मीटर राइफल इवेंट में 1875.3 स्कोर के साथ  वर्ल्ड जूनियर रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड जीता।
* जूनियर मिक्सड टीम इवेंट में, एलावेनिल वालारिवन के साथ गोल्ड जीता वर्ल्ड जूनियर रिकॉर्ड 498.6 स्कोर के साथ।
* 2018 में ISSF वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप : पार्टनर श्रेया अग्रवाल के साथ10 मीटर एयर राइफल जूनियर मिक्सड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज़।
* 2019 में बीजिंग में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप: अंजुम मौदगिल के साथ मिक्सड टीम इवेंट में गोल्ड।
* पुतिन में 2019 आईएसएसएफ वर्ल्ड कप : क्रोएशिया के साथी स्निजाना पेजिक के साथ एक और गोल्ड ।
* 2019 में, प्रतिष्ठित गोल्डन टारगेट अवार्ड जीता, जो सीजन के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाजों को दिया जाता है।
 
कोविड के दौरान भी ओलंपिक की तैयारी जारी रखी। घर से दूर दिल्ली में डॉ.कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में नेशनल शूटिंग कैंप में रहे।इसी दौरान खुद भी कोविड पॉजिटिव हुए।  फिट होते ही फिर से ट्रेनिंग जारी।अभिनव बिंद्रा,ओलंपिक में व्यक्तिगत गोल्ड जीतने वाले एकमात्र भारतीय हैं और वे ही उनके आयडल हैं। उनसे उम्मीद है तभी तो टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के कोर ग्रुप में प्रमोट किया गया था।अब नज़र टोकियो में मैडल पर है।अगर टोकियो ओलंपिक 2020 में ही हो जाते तो वे 18 साल से भी कम उम्र में ओलंपियन बन गए होते – अब इरादा है 19 साल से भी कम उम्र में ओलंपिक मैडल जीतने का।
  
– चरनपाल सिंह सोबती
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