She is just 22 Years and youngest to qualify for Olympics in Sailing !

नेत्रा कुमानन : सेलिंग में ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफाई करने वाली सबसे कम उम्र की और पहली भारतीय महिला सेलर 
 
नेत्रा कुमानन , उम्र 22 साल – अपने ओलंपिक सपनों को साकार करने के लिए जो कड़ी मेहनत की उसका नतीजा आ चुका है – नौकायन (सेलिंग) में, ओलंपिक के लिए सीधे 
क्वालिफाई करने वाली सबसे कम उम्र की और पहली भारतीय महिला नाविक। तलवारबाजी (फेंसिंग- Fencing) में भवानी देवी के क्वालिफाई करने की चर्चा अभी चल ही रही थी कि नेत्रा ने रिकॉर्ड बना दिया। ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करना और साथ में इंजीनियरिंग की पढ़ाई , डांस और पेंटिंग भी – ये सब आसान है क्या ?   
  
चेन्नई की लड़की नेत्रा ने किसी वाइल्ड कार्ड एंट्री या कोटा जगह की बदौलत नहीं, संयुक्त एशियाई और अफ्रीकी ओलंपिक क्वालिफायर ओमान में मुसना ओपन चैंपियनशिप (Mussanah Open Championship) में लेजर रेडियल इवेंट (Laser Radial Event) में नंबर 1 पर आकर क्वालिफाई किया।नेत्रा सेलिंग में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली 10 वीं भारतीय एथलीट बनीं लेकिन पहली महिला – पिछले सभी 9 ने क्वालिफायर के जरिए कोटे की जगह पर नॉमिनेशन हासिल किया था ( ये 9 : नछत्तर सिंह जौहल (2008), श्रॉफ और सुमित पटेल (2004), एफ तारापोर और साइरस कामा (1992), केली राव (1988), ध्रुव भंडारी (1984), सोली कांट्रेक्टर और एए बेसिथ (1972)।
 
नेत्रा के लिए सेलिंग महज एक खेल नहीं। गो स्पोर्ट्स फाउंडेशन ने सही समय पर अपने स्टार्स ऑफ़ टुमॉरो प्रोग्राम में ड्रीम 11 फाउंडेशन के साथ मिलकर उनके ओलंपिक सपनों को हर तरह की मदद की इस महंगे खेल के लिए। पिछले कुछ सालों से लेजर रेडियल में नेशनल चैंपियन हैं। इंचियोन और जकार्ता में क्रमशः 2014 और 2018 एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया। जकार्ता में 2018 एशियाई खेलों में, लेजर रेडियल में नंबर 5 रही थीं।2016 में रियो ओलंपिक से चूक गईं। तमस की कोचिंग में चार साल में कमियों को दूर किया। सेलिंग में वर्ल्ड कप मैडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं- मियामी, अमेरिका में 2020 सेलिंग वर्ल्ड कप में ब्रॉन्ज़ जीता।
 
जब कोविड ने पूरी दुनिया को चपेट में लिया तो नेत्रा अबू धाबी में ओलंपिक क्वालिफायर की तैयारी कर रही थीं। कोविड के कारण ये रद्द हो गए। ये लगन ही थी कि लॉकडाउन में भी वे घर नहीं लौटीं – अपने हंगरी के कोच तमस एस्स (दो बार के ओलंपियन) की स्पेन में एकेडमी ग्रैन कैनरिया में रहीं ताकि प्रैक्टिस करती रहें। अपना समय इंजीनियरिंग की पढ़ाई और सेलिंग के बीच बांटा- पढ़ाई के लिए सुबह 3.30 बजे उठना और 9.30 बजे से ट्रेनिंग। इतने मजबूत इरादे वाले एथलीट ही मंज़िल तक पहुंचते हैं। उनके कोच के शब्दों में,अपनी उम्र के हिसाब से वे बेहतर फार्म में हैं जबकि महिला नाविक आमतौर पर लगभग 24-25 साल की उम्र में अपनी सबसे बेहतर फार्म दिखाना शुरू करती हैं। कोच के अनुसार टोकियो में 44 प्रतियोगी से मुकाबला है और अगर नेत्रा टॉप 20 में आ गईं तो यह बहुत अच्छा होगा। वे इसे बड़े सफर की शुरुआत मानते हैं क्योंकि अगला ओलंपिक तीन साल दूर है और इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है।
 
यॉटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया भी तारीफ की हक़दार है- इस बार चार सेलर ने सीधे क्वालिफाइ किया है। ऐसा इससे पहले कभी नहीं हुआ। ये वह खेल है जो पूरी तरह से सरकारी मदद पर निर्भर हैं। अब सेलिंग खेल मंत्रालय के TOPS प्रोग्राम का हिस्सा हैं। उनकी फंडिंग में भी 60-70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। SAI उन्हें हर चीज के लिए फंड देता है- इक्विपमेंट, ट्रेनिंग, कोच, सपोर्ट स्टाफ। तमिलनाडु सेलिंग एसोसिएशन ने सबसे पहले नेत्रा को यूरोप में  ट्रेनिंग के लिए भेजा था।  
 
 पिता सॉफ्टवेयर व्यवसाय में हैं – उन्होंने शुरू से नेत्रा का साथ दिया। नेत्रा के साथ जुडी एक बड़ी मजेदार बात है उनकी आल राउंड टैलेंट- 12 साल की थीं, तब तक टेनिस, साइकिलिंग, बास्केटबॉल के मुकाबलों और यहां तक कि भरतनाट्यम के शो में भी हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। सेलिंग तो इसके बाद आई। चेन्नई के एसआरएम कॉलेज से   इंजीनियरिंग कर रही हैं – बीई मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दूसरा साल। एक अच्छी डांसर, गायक और आर्टिस्ट भी हैं। 
  अब ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली भारतीय महिला नाविक बन जाएंगी।

– चरनपाल सिंह सोबती