Age Fraud Ban to Olympics- The journey of Indian Woman TT Qualifier for Tokyo Olympics

सुतीर्थ मुखर्जी : अप्रैल 2020 वर्ल्ड रैंक 502 थी – आज टॉप 100 में हैं और टोकियो में मुकाबला करेंगी 
 
महिला सिंगल्स में, टोकियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वालों में एक नाम भारत की नंबर 2 खिलाड़ी सुतीर्थ मुखर्जी का है। सुतीर्थ ने दोहा में एशियाई ओलंपिक  क्वालिफिकेशन कम्पीटिशन में वर्ल्ड नंबर 62 मनिका बत्रा को 4-2 (7-11, 11-7, 11-4, 4-11, 11-5, 11-4) से हराया। इस जीत ने टोकियो का टिकट दे दिया ।

ओलंपिक बर्थ बुक करने का सुतीर्थ मुखर्जी का सफर बहुत लंबा रहा। ये वही सुतीर्थ हैं जिन पर 2015 में गलत उम्र बताने के आरोप को फ्रॉड का नाम देकर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया गया था। उन्हें लगा था करियर यहीं ख़त्म। वे 2016 रियो ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन मुकाबलों में हिस्सा तक नहीं ले पाईं।  
 
नैहाटी में जन्मी मुखर्जी उस समय भारत की टॉप महिला पैडलर थीं – “किसी भी एथलीट के लिए, एक साल के लिए बाहर बैठना एक बड़ा झटका है। मुझे मानसिक चोट लगी थी। जब भी मैं खेलने की कोशिश करती तो यादें वापस लौट आती।”  माता-पिता और कोच ने टूटने नहीं दिया – ” सभी ने मुझसे कहा, तेरा टाइम आएगा, तू वापस आएगी।” बस इसी उम्मीद से फिर से प्रैक्टिस शुरू कर दी। अब वही मेहनत रंग लाई और 25 साल की सुतीर्थ ने दोहा में भारत की मौजूदा नंबर 1 महिला खिलाड़ी मनिका बत्रा को हराया। सुतीर्थ ने कहा – “ओलंपिक खेलना मेरा सपना है और मैंने इसके लिए लंबा इंतजार किया है।” 
 
खेल में शुरुआत बंगाल के एक छोटे शहर नैहाटी में हुई। घर के पास एक क्लब में टेबल टेनिस खेलना शुरू किया। मां, नीता खुद अच्छा खिलाड़ी बनना चाहती थीं , उन्होंने अपना सपना बेटी के मार्फ़त पूरा किया। बचपन के कोच मिहिर घोष ने इसे आगे बढ़ाया। माँ हर कदम पर  साथ थीं। घर छोड़ दिया और हर टूर्नामेंट एवं ट्रेनिंग में बेटी के साथ। बेहतर ट्रेनिंग के लिए नैहाटी छोड़ दिया – पुराने भारतीय खिलाड़ी और नेशनल कोच सौम्यदीप रॉय और पोलोमी घटक की एकेडंमी में ट्रेनिंग के लिए जादवपुर आ गए।
  
2017 और 2019 में दो नेशनल सिंगल्स टाइटल जीते। 2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ खेलों में भारत की  गोल्ड विजेता महिला टीम का हिस्सा थीं। अप्रैल 2020 में, वर्ल्ड रैंकिंग में  502 नंबर पर होने के बावजूद आज टॉप 100 में  हैं। कोई मजाक नहीं है ये। तब भी उसके पास कोई इंटरनेशनल ट्रेनिंग नहीं , स्पांसर नहीं और यहां तक कि उनका नाम भारत की ओलंपिक  उम्मीद को मदद करने वाली ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) में भी नहीं था। तब भी भारत की टेबल टेनिस लीग में दुनिया के कुछ टॉप पैडलर्स को हराया – 2019 में यू मुम्बा के लिए खेलते हुए जर्मनी के वर्ल्ड नंबर 20 पेट्रीसा सोलजा को और पिछले साल जनवरी में पुर्तगाल में वर्ल्ड टीम क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट में 19 रैंकिंग वाली रोमानियाई बर्नैडेट स्कोक्स को 

हराया ।

 
टोकियो की तैयारी के लिए वे अभी भी यूरोप में ट्रेनिंग का मौका ढूंढ रही हैं। 2008 की ओलंपियन नेहा अग्रवाल बताती हैं –  “वह बहुत अटैकिंग  है और टेबल के करीब खड़े होने से अपने शॉट्स जल्दी खेलती है, जिससे सामने वाले को रिएक्शन का कम समय मिलता है।कोविड महामारी  के दौरान मजबूरी में सुतीर्थ ने अपनी फिटनेस में सुधार पर मेहनत की, जिसका फायदा अब मिल रहा है।अब वह टॉप 100 में है और टोकियो ओलंपिक में जा रही है।

– चरनपाल सिंह सोबती