Will India host this major international football tournament?

2027 एएफसी एशियन कप की मेजबानी के दावे के साथ जुड़ी है भारतीय फुटबॉल का ग्राफ ऊपर ले जाने की कोशिश

 

देश में किसी बड़े टूर्नामेंट का आयोजन उस खेल के लिए क्रांति लाता है। भले ही कपिल देव की टीम ने 1983 में क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीता पर देश में क्रांति आई 1987 के वर्ल्ड कप की मेज़बानी के साथ। अब यही उम्मीद इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन लगा रही है 2027 एएफसी एशियन कप की मेजबानी के दावे के साथ। 16 दिसंबर 2020 को इस दावे की मुहिम शुरू की और साल खत्म होते होते अपना दावा पेश भी कर दिया। एसोसिएशन ने इस बात पर जोर दिया कि इसका उद्देश्य देश की युवा आबादी में खेल के लिए रुझान बढ़ाने, नए व्यावसायिक अवसर बढ़ाने, विकास को तेजी देने और बेहतर इंफ़्रा स्ट्रक्चर जुटाने के साथ भारतीय फुटबॉल को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
 
भारत ने एशियन कप के लिए सिर्फ चार बार और पिछले तीन दशकों में दो बार क्वालिफाई किया है। दोनों बार, 2011 और 2019 में, टीम ग्रुप राउंड से आगे जाने में नाकामयाब रही और 2023 के लिए अभी मुकाबले में हैं ।  
 
फिर भी, ये भी कम नहीं कि भारत आज ऐसी स्थिति में है कि इंटरनेशनल टूर्नामेंट की मेजबानी के बारे में सोच सकते हैं। भारत में 2017 का फीफा अंडर -17 वर्ल्ड कप का आयोजन देश के लिए बड़ा ख़ास था। अब फीफा अंडर -17 महिला वर्ल्ड कप और एएफसी महिला एशियाई कप को कामयाब बनाने में जुटे हैं।ऐसे में एशिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट की मेजबानी अगर मिल जाती है तो ये भारतीय फुटबॉल के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। भारत का दावा है 11 शहर में मैच और 318.65 करोड़ रुपये का बजट।मेजबानी का फैसला इस साल होगा और मेजबान का टूर्नामेंट में हिस्सा लेना पक्का हो जाएगा। भारत के दावे की कुछ ख़ास बातें : 
 
मैच कहाँ : अहमदाबाद, भुवनेश्वर, गोवा, गुवाहाटी, हैदराबाद, कोच्चि, कोलकाता, नवी मुंबई (डीवाई पाटिल और नया बनने वाला पनवेल-खारगर स्टेडियम – 40,000 सीट वाले स्टेडियम का निर्माण 2026 में पूरा होने की उम्मीद) ,दिल्ली, पुणे और तिरुवनंतपुरम के 12 स्टेडियम में। कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में फाइनल जबकि कोच्चि, तिरुवनंतपुरम, नई दिल्ली और नवी मुंबई दो सेमीफाइनल के दावेदार।  
 
अन्य दावेदार : ईरान (14 स्टेडियम), कतर (12 स्टेडियम) और सऊदी अरब (10 स्टेडियम )।  
 
बजट : भारत $ 44 मिलियन, क़तर $137 मिलियन जबकि सऊदी अरब और ईरान ने बजट नहीं बताया।  
 
भारत अपने बजट का लगभग आधा हिस्सा इंफ़्रा स्ट्रक्चर और सिक्योरिटी के इंतज़ाम पर खर्च करेगा। एआईएफएफ का अनुमान है स्टेडियम और ट्रेनिंग सुविधा अपग्रेड करने में 92.20 करोड़ रुपये खर्च होंगे।एआईएफएफ का लक्ष्य टूर्नामेंट से जुड़े टूरिज्म से 100 मिलियन डालर और टिकट मनी से 76 करोड़ रुपये की कमाई। इस बजट में 2026 एशियाई अंडर -23 चैम्पियनशिप की मेजबानी का खर्चा शामिल है जो 2027 एशियन कप के आखिरी मेजबान के लिए ट्रायल टूर्नामेंट होगा।एआईएफएफ का कहना है कि सरकार से पूरा सहयोग मिलना पक्का है।एक संसदीय कमेटी ने भी सिफारिश की है कि भारत को और ज्यादा इंटरनेशनल टूर्नामेंट की मेजबानी करनी चाहिए। अंडर-17 वर्ल्ड कप की तरह से इसके लिए भी Mission XI Million आयोजित करेंगे, युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए।
 
क्या भारत को 2027 एएफसी एशियन कप की मेजबानी मिलेगी – ये तो आने वाला समय बताएगा। इतना तय है कि कम बजट के साथ इस तरफ सोचा और कोशिश कर रहे हैं , ये भी कम नहीं। 
 
– चरनपाल सिंह सोबती