The Story of Great Indian Woman Who is Mother of two & Conquered Mount Everest not once not twice but….

Image by David Mark from Pixabay
दो बच्चों  की माँ, अंशु जामसेनपा ने माउंट एवरेस्ट को मानो मजाक बना दिया 
 
जो एक बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने में कामयाब हो जाते हैं उनके नाम का जिक्र बार- बार होता है – विश्वास कीजिए अरुणाचल प्रदेश की 41 साल की अंशु जमसेनपा 5 बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहरा चुकी हैं। इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर खेलों से जुड़ी जिन हस्तियों को सम्मानित किया गया उनमें से एक नाम अंशु जमसेनपा का भी  है – उन्हें पद्म श्री का सम्मान मिला। अंशु ने कहा – ‘अवार्ड खिलाड़ियों को उत्साहित करते हैं लेकिन पद्म श्री का मतलब है जिम्मेदारी।मैं अपना पद्म श्री अवार्ड Indian Mountaineering Foundation और भारत की माउंटेनियरिंग बिरादरी को समर्पित करती हूं।’
 
अंशु जामसेनपा ने माउंट एवरेस्ट पर 5 बार कामयाबी पाई – इस बात के लिए उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज़ है। इनमें से, 2017 में तो वे 5 दिनों में दो बार माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली महिला बनी थीं।जामसेनपा का एवरेस्ट सफर देखिए :   
 
2011: 12 मई को पहली बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचीं और 21 मई को दूसरी बार ये कमाल कर दिखाया।
2013: उत्तर पूर्वी भारत एवरेस्ट अभियान 2013 में सुरजीत सिंह लिशंगथेम के नेतृत्व में माउंट एवरेस्ट को फतह किया।
2017: 5 दिन के अंदर दो बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर – एक सीज़न में दो बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने का रिकॉर्ड दो बार बनाने वाली दुनिया की पहली महिला। साथ ही सबसे ज्यादा बार किसी भारतीय महिला के एवरेस्ट पर पहुँचने का रिकॉर्ड भी बनाया।  
 
2017 में ,14 वें दलाई लामा का आशीर्वाद लेने के बाद, 2 अप्रैल को गुवाहाटी से एवरेस्ट अभियान शुरू किया। 16 मई सुबह 9.15 बजे 17 अन्य पर्वतारोहियों के साथ आखिरी चढ़ाई शुरू की और तिरंगा फहराया।19 मई को नेपाली पर्वतारोही फेरी शेरपा के साथ अपना दूसरा मुश्किल अभियान शुरू किया और आखिरकार 21 मई 2017 को सुबह 7.45 बजे टॉप पर थीं। एक सीजन में दो बार एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने का रिकॉर्ड तो वे हालांकि 2011 में भी बना चुकी थीं पर तब  इसके लिए 10 दिन लिए थे लेकिन 2017 में तो सिर्फ 118 घंटे और 15 मिनट का समय लिया – ऐसी तेजी आज तक किसी महिला ने नहीं दिखाई। 5 दिनों में दो बार 8,848 मीटर ऊंची एवरेस्ट पर तिरंगा फहराना कोई मजाक नहीं। 2017 में उन्हें Tenzin Norgay National Adventure Award मिला था।

वे डारंग में पैदा हुई थीं – अरुणाचल प्रदेश में एक दूरस्थ पहाड़ी शहर।पिता Indo-Tibetan Border Police में ऑफिसर और मां नर्स। जामसेनपा के पति टेरसिंग वेंज All Arunachal Pradesh Mountaineering and Adventure Sports Association के अध्यक्ष हैं। परिवार अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में बोमडिला में रहता है।अंशु अब साथ साथ पर्वतारोहियों को ट्रेनिंग देती हैं और 3,000 से ज्यादा को ट्रेनिंग दे चुकी हैं।
 
माउंटेनियरिंग में जामसेनपा ने 2009 से रूचि ली।वे रॉक क्लाइम्बिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स में थीं।पति ने माउंटेनियरिंग के लिए प्रोत्साहित किया।एक बार शुरुआत की, तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। “मैंने सभी तरह की ट्रेनिंग की – रनिंग, जिम, योग, एरोबिक्स, हाइकिंग आदि। मैंने खुद को बड़े मुकाबले के लिए तैयार करने के लिए कई अन्य चोटियों पर भी चढ़ाई की।”  उनके लिए पद्म श्री का सम्मान हर भारतीय महिला और मां के लिए गौरव की बात है। उनसे पहले भारत से माउंटेनियरिंग में सिर्फ बचेंद्री पाल, संतोष यादव, प्रेमलता अग्रवाल और अरुणिमा सिन्हा को ही पद्म अवार्ड से सम्मानित किया गया है। 
 
– चरनपाल सिंह सोबती 
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