From a Agriculture to Bike racing records…A success story of a villager…

शोरानुर के धान के खेतों से डकर के रेत के टीलों पर बाइक रेसिंग में नाम कामना कोई मजाक नहीं 

पिछले 12 सालों में बहुत कुछ बदल गया है। ये एक कहानी है। केरल के पलक्कड़ जिले के एक कस्बे शोरानुर में हरित नुह नाम के एक लड़के को अपने 16 वें जन्मदिन पर तोहफे में बाइक मिली। तब बाइक चलने के जोश में  हरित नुह ने अपने घर के पास धान के खेतों में एक एम्योचर बाइक रेस में हिस्सा लिया – सबसे आखिरी नंबर पर रहे।अब 28 साल के हैं हरित नुह और वे दुनिया में सबसे अच्छे बाइक रेसर में से एक हैं। 
हाल ही में सऊदी अरब में डकर रैली को पूरा किया- ये ऐसी मुश्किल रेस है कि बाइकर्स इसकी तुलना माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई से करते हैं।लगभग दो हफ्ते में रेत के टीलों, पथरीली सड़कों और घाटियों के ऊपर 7,500 किलोमीटर से अधिक की दूरी पूरी की, लगभग 55 घंटे बाइक चलाई और 20 वें नंबर पर रहे – ये किसी भी भारतीय का इस रेस में आज तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।  
ये बदलाव संयोग का नतीजा है।सालों पहले, उनकी जर्मन मां, सुसैन केवी, कर्नाटक संगीत के कलामंडलम में कर्नाटक संगीत सीखने आईं थीं। एक  दिन ब्रैड खरीदने बाहर निकलीं तो बेकर मोहम्मद रफी की दुकान पर पहुँच गईं। ये मुलाकात ऐसा रंग लाई कि दोनों ने शादी कर ली और तय हुआ कि जर्मनी में बस जाएंगे।कुछ समय के लिए जर्मनी चले भी गए, लेकिन जब नुह लगभग दो साल के थे तब केरल वापस लौट आए। पिता ने नई बेकरी खोल ली और मां ने चावल और धान के खेत तथा डेयरी का काम। खाली हों तो पेंटिंग भी।
जब नुह को तोहफे में बाइक मिली तो वास्तव में उन्हें इसे चलाना भी नहीं आता था।वे कोडईकनाल के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ रहे थे। छुट्टियों में घर आए तो पास के एक धान के खेत में बाइक की आवाज़ सुनी। देखा कि बाइकर्स एक रेस के लिए ट्रेनिंग ले रहे थे। इसी ट्रेनिंग से पहली रेस में हिस्सा लिया। अब उसी नुह ने  डकर रेस में नाम कमाया। इससे पहले टीवीएस रेसिंग राइडर, नूह ने सात सुपरक्रॉस नेशनल चैंपियनशिप जीतीं। 2019 में डकर में, पहली बार हिस्सा लेते हुए तीसरे राउंड में रेस को छोड़ना पड़ा था क्योंकि रास्ते से भटक गए थे, जो इस रेस में एक आम बात है। डकर की दो रेस में वे अपनी शेरको टीवीएस आरटीआर 450 रैली मोटरसाइकिल से कितनी बार गिरे हैं – उसकी गिनती भी याद नहीं। पिछली रेस के दौरान कई एक्सीडेंट मारे, चोटें खाईं, आँख सूजी, फटी क्वाड्रिसप मांसपेशी और घुटने की चोट के बावजूद रेस जारी रखी। स्टेज 11 में अपना रास्ता खो दिया पर तभी किसी और रेसर ने सही रास्ते की तरफ  इशारा किया।
वे कहते हैं – “डकर के बाद, आप जीवन को समझ जाते हैं क्योंकि रेस के दौरान की मुश्किलें और खतरे बड़ा कुछ सिखा देते हैं।मुझे लगता है कि डकर में, आपको कौशल, फिटनेस, मेंटल टफनेस और नेविगेशनल कौशल की जरूरत होती है।” उनकी भी सर्जरी हुई – प्लेट डाली गई टूटी कॉलरबोन को ठीक करने के लिए। एक शौक ने दुनिया के सबसे बेहतर रेसर में से एक बना दिया नुह को।


– चरनपाल सिंह सोबती

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