What is special and common between Anju Bobby George and Washington Sundar?

अंजू और सुंदर पक्के इरादे की कहानी हैं – कमी है तो क्या हुआ ?

 
अंजू बॉबी जॉर्ज एक एथलीट और वाशिंगटन सुंदर एक क्रिकेटर। क्या समानता है इन दोनों की कहानी में कि जिक्र साथ साथ हो? समानता है कमी को अपने इरादे पर हावी न होने देना। 
 
अपने समय में भारत की मशहूर एथलीट रही अंजू बॉबी जॉर्ज ने अपनी जिंदगी का एक रहस्य अब बताया। उनके शरीर में एक ही किडनी है।अंजू के लिए इस वजह से कई दिक्कतें थीं, जिसमें पेन किलर और एलर्जी की दवाई लेते रहना शामिल है, फिर भी वे एथलीट बनीं और इंटरनेशनल मुकाबलों में मैडल जीते। 
 
आईएएएफ विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप (पेरिस) में 2003 में ब्रॉन्ज़ और आईएएएफ विश्व एथलेटिक्स फाइनल्स (मोनेको) में 2005 में गोल्ड विजेता अंजू ने कहा -“मानो या न मानो, मैं  उन बहुत भाग्यशाली में से एक हूं, जो एक किडनी  के साथ दुनिया में टॉप पर पहुंच गए।” इसमें  कोच का योगदान है तो उनकी अपनी टेलेंट का जादू भी।पति रॉबर्ट बॉबी जॉर्ज  ही उनके कोच थे और उन के तहत उनका करियर खिल उठा।ये बात पता लगते ही खेल मंत्री किरेन रिजिजू भी खुद को रोक नहीं पाए और उनकी कड़ी मेहनत,पेशेंस,पक्के इरादे और इनके साथ भारत को कामयाबी दिलाने की तारीफ की – “अंजू के विश्व एथलेटिक चैम्पियनशिप में मैडल जीतने वाली अब तक एकमात्र भारतीय होने पर सभी को उन पर गर्व है! ” 
 
अंजू एक कामयाब ट्रैक और फील्ड स्टार रहीं।1996 में 5.98 मीटर छलांग को रॉबर्ट की कोचिंग ने निखारा। शुरूआत 2002 में बुसान में 6.53 मीटर की छलांग के साथ एशियाई खेलों में गोल्ड के साथ हुई। 2004 में एथेंस ओलंपिक में नंबर 6 और 6.83 मीटर की अपनी सबसे बेहतर छलांग लगाई – 2007 में ये रिकॉर्ड नंबर 5 का बन गया क्योंकि USA  की मेरियन जोन्स  डोपिंग के लिए डिसक्वालिफाई हो गईं।उसके बाद सबसे ख़ास रहे आईएएएफ विश्व एथलेटिक्स के मैडल।    
 

जन्म से शरीर में ऐसी ही किसी कमी के बावजूद मजबूत इरादे के साथ खेलने वाली अंजू एकमात्र खिलाड़ी नहीं हैं।ऐसी हर कहानी एक प्रेरणा है।अंजू के इस रहस्य के सामने आने के साथ ही इन दिनों खेल रहे एक और खिलाड़ी की कमी के बारे में पता लगा। ये कहानी है क्रिकेटर वाशिंगटन सुंदर की। चेन्नई के 21 साल के सुंदर वन डे और टी 20 में भारत के लिए खेल रहे हैं।

उपयोगी बाएं हाथ के बल्लेबाज लेकिन ख़ास भूमिका ऑफ स्पिनर के तौर पर। सुंदर को 18 साल की उम्र में, मार्च 2018 में श्रीलंका और बांग्लादेश के खिलाफ टी 20 आई ट्रायंगुलर में खेलने का मौका मिला।6 मैचों में 15 की औसत से 9 विकेट 5.67 के इकॉनमी रेट के साथ और इसकी बदौलत मैन-ऑफ-द-सीरीज़ बने। उन्हें आईपीएल 2017 में राइजिंग पुणे सुपरजायंट ने रविचंद्रन अश्विन की जगह खरीदा। क्वालिफायर1 में मुंबई इंडियंस के विरुद्ध 3-16 के आंकड़े दर्ज किए।2018 में रॉयल चेलेंजर्स ने ले लिया। तो कमी क्या है ?
 
सुंदर जन्म से एक कान से बहरे हैं।माता-पिता इस मुद्दे पर 4-5 साल  की उम्र में ही डॉक्टर के पास ले गए थे पर कोई फायदा नहीं हुआ।वे पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया में भी खेले पर इस कमी का किसी को एहसास तक नहीं हुआ। सुंदर खुद भी इसका जिक्र नहीं करते।इतना ही नहीं वे जबरदस्ती के बनाए खब्बू में से एक हैं।ऐसा करने वाले भले वे पहले नहीं पर पक्का इरादा चाहिए इसके लिए। 
– चरनपाल सिंह सोबती