इंग्लैंड के इन दिनों के दक्षिण अफ्रीका टूर में एक ऐसी घटना हुई जिसने जानकारों को स्पोर्ट्समैनशिप की परिभाषा पर फिर से नज़र डालने पर मज़बूर कर दिया है।

सही तकनीक के साथ खेलना जितना जरूरी, उतना ही सही स्पोर्ट्समैनशिप के साथ भी 

 
ये कोई नया मसला या सुझाव नहीं है कि खेल खेलो तो सही स्पोर्ट्समैनशिप यानि कि खेल भावना के साथ। फिर भी ये बात बार बार बताना / याद दिलाना जरूरी हो जाता है क्योंकि कामयाबी की परिभाषा को गलत समझ लिया जाता है। हर कीमत पर जीतने की चाह में स्पोर्ट्समैनशिप का पीछे रह जाना कोई हैरानी की बात नहीं। इसीलिए नेशनल क्रिकेट एकेडमी (एनसीए) के कोच राहुल द्रविड़ ने भी इस मसले को फिर उठाया। अपनी क्रिकेट को हमेशा सही स्पोर्ट्समैनशिप के साथ खेले राहुल द्रविड़ ने युवा ट्रेनी को याद दिलाया कि सही  स्पोर्ट्समैनशिप भी खेल का एक ख़ास हिस्सा है।ये बात सिर्फ क्रिकेट में नहीं, हर खेल में लागू है। 

रिटायर होने के बाद भी भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ दुनिया भर के कई क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा हैं। उनकी गिनती सबसे मजबूत इरादे वाले लेकिन सबसे सज्जन क्रिकेटरों में होती है।
द्रविड़ ने भारत की अगली पीढ़ी को सचेत करते हुए कहा – मुझे तब बड़ी  निराशा होती है जब मैं बहुत से युवा को देखता हूं जो प्रतिभा को बर्बाद कर देते हैं अपने गलत व्यवहार से। सज्जनता खेल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था और है। द्रविड़ ने कहा, आपका वास्तव में सफल होने के लिए मतलबी और बुरा होना जरूरी नहीं।
 
संयोग से एक तरफ द्रविड़ ने ये बात कही तो उसके साथ ही वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम ने एमसीसी (MCC) स्पिरिट ऑफ़ क्रिकेट अवार्ड जीता – अपने इस साल के इंग्लैंड टूर के लिए। जबकि COVID-19 महामारी के चलते क्रिकेट बिलकुल रुक ही गई थी, वेस्टइंडीज ने अपनी पुरुष और महिला दोनों टीम को इंग्लैंड टूर पर भेजा। इसी से इंटरनेशनल क्रिकेट का आयोजन फिर शुरू हुआ और हर देश को ये लगा कि कुछ ख़ास सावधानियों के साथ फिर से क्रिकेट खेली जा सकती है। उस माहौल में क्रिकेट वेस्टइंडीज का फैसला और हिम्मत तारीफ की बात है। इसीलिए वे अवार्ड जीते। वेस्टइंडीज टीम को अक्टूबर में क्रिकेट राइटर्स  क्लब ने भी इसी के लिए अवार्ड दिया था।
इस के साथ इंग्लैंड के इन दिनों के दक्षिण अफ्रीका टूर में एक ऐसी घटना हुई जिसने जानकारों को स्पोर्ट्समैनशिप की परिभाषा पर फिर से नज़र डालने पर मज़बूर कर दिया है।
दक्षिण अफ्रीका में टी 20 सीरीज के दौरान इंग्लैंड टीम के एनालिस्ट नाथन लेमन, क्लिपबोर्ड पर लिखे नंबर और अक्षरों के साथ ग्राउंड में कप्तान इयोन मोर्गन को मैच की रणनीति के इशारे भेज रहे थे। खुद इंग्लैंड के पुराने कप्तान माइकल वॉन इसे गलत मानते हैं पर मौजूदा कप्तान मोर्गन की नज़र में ये सही स्पोर्ट्समैनशिप के दायरे से बाहर नहीं। वे कहते हैं कि ड्रेसिंग रूम से सिर्फ इशारा मिला,किसी फैसले का आदेश नहीं। मैच के दौरान सारे फैसले पहले की तरह कप्तान ने ही लिए।

अब जैसे ये मामला उछल गया है तो उसे देखते हुए जरूरी है आईसीसी इस पर ध्यान दे।क्रिकेट में इसे गलत माना गया पर दूसरे खेलों में स्थिति क्या है ?दो प्रमुख खेलों के बारे में बात करते हैं – फुटबॉल और टेनिस।फुटबॉल में, मैनेजमेंट लाइव कोचिंग कर सकते हैं यानि वे न सिर्फ जानकारी, नोट्स भी पास कर सकते हैं। टेनिस में, कोच भी खिलाड़ी को संकेत नहीं दे सकता। यूएस ओपन 2018 के दौरान, सेरेना विलियम के कोच पैट्रिक मौरतोग्लू को जब इशारे करते देखा गया तो सेरेना को इसके लिए चेतावनी दी गई थी।

– चरनपाल सिंह सोबती