आईपीएल वाली चमक – दमक की वजह ,असल में एक बड़ा ख़ास रिकॉर्ड नज़रअंदाज़ हो गया !

इस आईपीएल वाली चमक – दमक को असल में बेहतरी में बदलें तो बात बने 
आखिरकार महिला क्रिकेट के लिए आईपीएल चैलेंज का न सिर्फ प्रोग्राम , टीम का नाम भी घोषित हो गया।

पिछले कुछ दिनों से भारत में महिला क्रिकेट के नाम पर सिर्फ इसी आईपीएल  चैलेंज की बात हो रही थी और इसी चक्कर में एक बड़ा ख़ास रिकॉर्ड नज़रअंदाज़ हो गया। जब ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे वन डे में न्यूजीलैंड को हराया तो वास्तव में लगातार 21 वनडे जीतने का रिकॉर्ड भी बनाया।ये कोई मामूली रिकॉर्ड नहीं है।उन्होंने पुरुष क्रिकेट में रिकी पोंटिंग की टीम के वर्ल्ड रिकॉर्ड को बराबर किया। मजा तब है जब इस रिकॉर्ड के पीछे ,ऑस्ट्रेलिया महिला टीम की मेहनत ,कामयाबी और इसके सबक को देखें। कुछ ख़ास बातें नोट कीजिए :
 *ऑस्ट्रेलिया ने इस दौरान हर विकेट के लिए दूसरी टीम की तुलना में लगभग 2.5 गुना ज्यादा रन बनाए।  * बल्लेबाज़ी में 42 का औसत जबकि रन रेट 5.4 प्रति ओवर रहा। * हर विकेट औसतन 17 रन की कीमत पर लिया और प्रति ओवर सिर्फ 3.6 रन दिए। * दूसरी टीम से लगभग 50 प्रतिशत तेजी से स्कोर बनाए।   *18 आईसीसी टूर्नामेंट में से ऑस्ट्रेलिया ने 11 जीते – 6 तो 2010 के बाद से ही।   * पिछले ढाई साल में 21वन डे में अपराजित – 5 देशों, 4 महाद्वीप में, 6 टीम के विरुद्ध जिनमें से 3 की गिनती टॉप 5 में होती है।7 सीरीज में क्लीन स्वीप का रिकॉर्ड – इनमें से 4 ऑस्ट्रेलिया से बाहर। * पुरुष टीम 21 वन डे में अपराजित रही लगभग 4 महीने के अंदर जबकि मेग लैनिंग की टीम ने अपनी श्रेष्ठता को लगभग ढाई साल बरक़रार रखा।ये ज्यादा मुश्किल था।

एक और मिसाल लेते हैं। मेग लैनिंग महिला क्रिकेट के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज में से एक – उनके पास महिला क्रिकेट में किसी और की तुलना में 4 वन डे शतक ज्यादा  हैं।
एलिसे पेरी न केवल सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंडर हैं – टेस्ट में बैट के साथ औसत 78 और गेंद के साथ 18, वनडे में 52 और 24 और ट्वेंटी 20 में 28 और 19 है। ये दोनों ब्रिस्बेन के तीसरे वन डे में नहीं खेलीं तब भी ऑस्ट्रेलिया ने 232 रनों से जीत हासिल की, 3-0 से सीरीज़ को जीता। 
ऐसा क्या किया ऑस्ट्रेलिया ने कि ऐसी कामयाबी मिली ? कुछ तो ख़ास है।

2013 में ऑस्ट्रेलिया क्रिकेटरों को प्रोफेशनल  कांट्रेक्ट देने वाला पहला देश बना। 2015/16 में महिला बिग बैश  को शुरू किया जिसने उन्हें मुश्किल मुकाबलों के लिए तैयार किया।ऑस्ट्रेलिया में महिला क्रिकेट के लिए रूचि का अंदाज़ा ये कि मार्च में मेलबॉर्न में भारत पर ऑस्ट्रेलिया की टी 20 वर्ल्ड कप जीत में 80,000 दर्शक मौजूद थे।

अब ऑस्ट्रेलिया जहाँ है अन्य टीमों के लिए मुकाबला और मुश्किल हो गया है। इस समय जहाँ वे या उनके साथ इंग्लैंड और न्यूजीलैंड टॉप पर हैं – अन्य टीमें ऐसा लगता है दूसरे ग्रेड में हैं।भारत शायद इन दोनों के बीच ही कहीं है। यही समय है महिला क्रिकेट को बचाने का – जितना जरूरी है ऑस्ट्रेलिया का बेहतर खेलना ,उतना जरूरी है अन्य टीमों को टूटने से बचाना।वेस्टइंडीज टीम के साथ क्या हुआ ? 2016 के टी 20 वर्ल्ड कप को जीतने के बाद वेस्टइंडीज टीम का ग्राफ लगातार नीचे गया है।जो गलती पुरुष क्रिकेट में हुई ,वही  महिला क्रिकेट में हो रही है।ऐसे में कम से कम महिला क्रिकेट के लिए आईसीसी को पहल करनी होगी – दूसरे ग्रेड की टीमों के 150 क्रिकेटरों को पेशेवर कांट्रेक्ट। इससे मुकाबले और अच्छा खेलने  की जो भावना पैदा होगी उसका जवाब नहीं। 
भारत की मिसाल लेते हैं। भारत ने भी 16 मैच लगातार जीते और 2017 वर्ल्ड कप जीतने के बहुत करीब थे। इस साल टी 20 वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचे। इसके बावजूद अभी भी  कोई राष्ट्रीय अंडर -16 टूर्नामेंट या स्कूल क्रिकेट प्रोग्राम नहीं बना पाए उन लड़कियों के लिए जो क्रिकेट खेलना चाहती हैं।नई क्रिकेटर कहाँ से मिलेंगी ? प्रतिभा है -उसे निखारने का सिस्टम नहीं है।

– चरनपाल सिंह सोबती

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