ख़राब रोशनी पर टेस्ट में खेल रोकने के मामले को सही नज़र से देखना होगा !

ख़राब रोशनी पर टेस्ट में खेल रोकने के मामले को सही नज़र से देखना होगा 
एक टीम टेस्ट में लगभग निश्चित हार के कगार पर हो और तब बरसात या ख़राब रोशनी हार बचाने में मदद कर दें तो ऐसे में बची टीम कतई शिकायत नहीं करेगी। दूसरी टीम के बारे में किसने सोचा ? कई टेस्ट हैं जिनमें ऐसा हुआ। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में एक पूरे दिन का खेल न होने पर दर्शकों को गेट मनी लौटने की मिसाल हैं पर अगर बार बार खेल रुके तो क्या ? चर्चा हो रही है सालों से पर कोई हल नहीं। 
जब लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट की बदौलत स्टेडियम में फ्लड लाइट्स लगीं तो लगा था कि इनका फायदा टेस्ट क्रिकेट को भी मिलगा।  बरसात नहीं है और सिर्फ ख़राब रोशनी में खेल रुका तो फ्लड लाइट्स की मदद से क्रिकेट जारी रख सकते हैं।  इसमें गलत क्या है और कई टेस्ट में वास्तव में , दिन के समय , रोशनी की कमी को पूरा करने के लिए फ्लड लाइट्स जलीं। 
तब भी क्यों इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच सीरीज के एजस बाउल के दूसरे टेस्ट के पूरे 5 दिन चलने के बावजूद सिर्फ  134.3 ओवर का खेल हुआ और दोनों टीम की एक पारी भी पूरी नहीं हुई।  जिस माहौल में , दर्शकों  के बिना , इस समय क्रिकेट खेली जा रही है उसमें ऐसा होना सबसे ज्यादा टेस्ट क्रिकेट को ही नुकसान पहुंचाएगा। स्टेडियम में फ्लड लाइट्स थीं , तब भी ऐसा हुआ। 
अंपायरों ने कहा फ्लड लाइट्स की रोशनी इतनी नहीं कि  उसमें लाल गेंद से क्रिकेट हो सके  – जबरदस्ती खेलेंगे तो क्रिकेटरों को चोट लगने का डर है।  जहाँ सवाल खिलाड़ियों की सुरक्षा का आ जाए वहां कोई भी नहीं कहेगा कि   जबरदस्ती खेलो। गड़बड़ ये है कि  ख़राब हुए समय की भरपाई के लिए कोई  ऐसी कोशिश नहीं होती जिससे ये लगे कि क्रिकेट के बारे में भी सोचा जा रहा है। ढेरों टेस्ट हैं जिनमें लंच या टी का तय समय नहीं बदला हालाँकि तब मौसम साफ़ था और क्रिकेट हो सकती थी , जबकि खेल के समय के दौरान खाली खिलाड़ी बैठे रहे। इसी  तरह सुबह , तय समय से पहले, क्रिकेट शुरू नहीं करते  जबकि उसमें कोई बुराई नहीं।  जो ब्रॉडकास्टर महंगी कीमत पर टेलीकास्ट अधिकार खरीदते हैं , यूं खेल रुकने पर उनसे भी तो कमाई वाला समय  छिन जाता है। 
जो  एजस बाउल के दूसरे टेस्ट में हुआ उससे सबक लेकर तीसरे टेस्ट के लिए तय हुआ कि , दूसरे दिन से, जरूरत हुई तो सुबह 30 मिनट पहले खेल शुरू कर सकते हैं और दिन में ख़राब हुए समय को पूरा करने के लिए दिन के आखिर में  खेल 30 मिनट आगे जारी रख सकते हैं।  इन  टेस्ट ने जो सबसे बड़ा सबक दिया वो ये   कि स्टेडियम में फ्लड लाइट्स लगवाते हुए ये ध्यान दें कि सिर्फ सफ़ेद गेंद  की क्रिकेट के लिए जरूरी नहीं, दिन में लाल गेंद से क्रिकेट के लिए भी जरूरी रोशनी मिल सके। मौजूदा  फ्लड लाइट्स में रात में गुलाबी गेंद से क्रिकेट हो जाती है और दिन वाली क्रिकेट के लिए हाल फिलहाल गेंद का रंग बदलने का कोई इरादा नहीं है। इस ख़राब रोशनी की मुश्किल के  बारे में सोचना होगा।


– चरनपाल सिंह सोबती 

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