इन क्रिकेटरों के बारे में भी सोचना जरूरी !

 
इंग्लैंड – वेस्टइंडीज टेस्ट सीरीज के साथ क्रिकेट ने वापसी की है। ये सीरीज शुरू होने के बाद ही अलग – अलग देशों से क्रिकेट मैचों  से जुड़ी ख़बरों के आने का सिलसिला शुरू हुआ। इंगलैंड में अगर सबसे पहले इंटरनेशनल क्रिकेट शुरू हुई तो घरेलू क्रिकेट भी वे ही सबसे पहले शुरू कर रहे हैं। 
प्रथम श्रेणी मैचों का जो  काउंटी चैंपियनशिप सीजन अप्रैल में ही शुरू  होकर सितम्बर में ख़त्म होता था , उसे अब बचे दिनों में पूरा कर पाना संभव नहीं। इसलिए इस साल के क्रिकेट कैलेंडर से  काउंटी चैंपियनशिप को हटा ही दिया है। इसकी जगह  प्रथम श्रेणी मैचों का एक नया टूर्नामेंट 1 अगस्त से खेल रहे हैं बॉब विलिस ट्रॉफी के नाम से। शुरू में  ECB ने कहा था कि ये  प्रथम श्रेणी मैच नहीं होंगे क्योंकि कोविड सब्सटीटयूट मैच में आएंगे और इनके कारण हो सकता है मैच में एक टीम के लिए 11 से ज्यादा खिलाड़ी खेल जाएं। बाद में काउंटी क्लब के दबाव में  ECB ने  अपनी सोच को बदला और अब   ये  प्रथम श्रेणी मैच गिने जाएंगे। साथ में टी 20  ब्लास्ट टूर्नामेंट होगा। 
इंग्लैंड का घरेलू क्रिकेट सीजन छोटा होने का नुक्सान ये हुआ कि  लगभग हर काउंटी क्लब ने अपने ज्यादातर विदेशी खिलाड़ियों के कॉन्ट्रेक्ट रद्द कर दिए। इसी लिस्ट में भारत के चेतेश्वर पुजारा और आर अश्विन का नाम भी है –  पुजारा  को ग्लूस्टरशायर और  अश्विन  को यार्कशायर के लिए खेलना था । आर अश्विन  के पास तो फिर भी IPL   कॉन्ट्रेक्ट है ,  पुजारा के लिए तो काउंटी कॉन्ट्रेक्ट बड़ा ख़ास था क्योंकि ये  उन्हें न  सिर्फ इंग्लिश पिचों पर अच्छी प्रेक्टिस का मौका देता है, पैसे का भी कुछ नुक्सान पूरा कर देता है। अब वे न तो इंग्लैंड में खेल रहे हैं और न ही  IPL की स्कीम में हैं  यानि कि भारत की टीम के ऑस्ट्रेलिया टूर पर रवाना होने से पहले  पुजारा ने किसी भी तरह का अच्छे मुकाबले वाला कोई मैच नहीं खेला होगा।  नुक्सान अगर  पुजारा का है तो भारतीय क्रिकेट का भी है। 
एक बार तो ECB ने भी सोच लिया था कि इस घरेलू सीजन से लाल गेंद वाले मैच बिलकुल ही हटा दें पर फिर ख्याल किया कि इंग्लैंड में उनके अपने कई क्रिकेटर ऐसे हैं जो पूरी तरह घरेलू क्रिकेट  पर निर्भर हैं  – उनका क्या होगा ? पूरी क्रिकेट की दुनिया में किसी एसोसिएशन या बोर्ड ने नहीं कहा कि मैच न भी हुए तो भी वे क्रिकेटरों को मैच फीस का पैसा देंगे। इसके उलट जगह -जगह से कॉन्ट्रेक्ट ख़त्म किए जाने या अभी पिछले सीजन की फीस न मिलने जैसी ख़बरें ही आईं। यही बात सपोर्ट और ग्राउंड स्टाफ पर लागू है। 
इसलिए क्रिकेट के सिस्टम के पटरी पर सही तरह आने का पता तब लगेगा जब चर्चा में  टेस्ट और    IPL   की तरह घरेलू क्रिकेट भी आएगी। 
– चरनपाल सिंह सोबती Charanpal Singh Sobti

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